वियतनाम के अंतरराष्ट्रीय मंच पर शोध-पत्र प्रस्तुत करेंगे भभुआ के आलोक उपाध्याय व स्मृति राज
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Sep 04, 2026
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11 सितंबर को Vietnamese-German University में होगा अकादमिक कार्यक्रम, जर्मन भाषा शिक्षण से जुड़े समसामयिक मुद्दों पर रखेंगे शोध
कैमूर----- भभुआ और कैमूर के लिए गौरव की बात है कि यहां के युवा शोधार्थी आलोक उपाध्याय आगामी 11 सितंबर 2026 को वियतनाम के अंतरराष्ट्रीय अकाडमिक मंच पर अपने शोध-पत्र की प्रस्तुति देंगे। बता दें कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के जर्मन अध्ययन विभाग में शोधरत आलोक उपाध्याय वियतनाम स्थित Vietnamese-German University में आयोजित अंतरराष्ट्रीय अकादमिक कार्यक्रम में शोध-पत्र प्रस्तुत करेंगे। उनके साथ स्मृति राज भी इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने शोध-पत्र की प्रस्तुति देंगी। वही आलोक उपाध्याय के अंतरराष्ट्रीय मंच पर शोध-पत्र प्रस्तुत करने की खबर से उनके गृह क्षेत्र भभुआ और कैमूर में खुशी का माहौल है। इस उपलब्धि को क्षेत्र के युवाओं की अकादमिक प्रतिभा और शोध के क्षेत्र में बढ़ती भागीदारी के रूप में देखा जा रहा है। खास बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुति के माध्यम से आलोक न केवल बनारस हिंदू विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करेंगे, बल्कि अपने गृह क्षेत्र भभुआ और कैमूर की पहचान को भी वैश्विक अकादमिक पटल तक पहुंचाएंगे।
प्रवासन, नस्लवाद और पहचान पर होगा विमर्श
वही आलोक उपाध्याय द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले शोध-पत्र में जर्मन भाषा शिक्षण के संदर्भ में प्रवासन, नस्लवाद, पहचान और सामाजिक-सांस्कृतिक अपनत्व जैसे महत्वपूर्ण एवं समसामयिक विषयों पर चर्चा की जाएगी। शोध में इस बात पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है कि विद्यार्थियों के बीच इन संवेदनशील और जटिल सामाजिक विषयों को किस प्रकार संवादात्मक तथा प्रभावी शिक्षण-पद्धतियों के माध्यम से समझाया जा सकता है। वही शोध-पत्र के माध्यम से विद्यार्थियों में केवल भाषा संबंधी दक्षता विकसित करने के बजाय आलोचनात्मक चिंतन, सामाजिक संवेदनशीलता और अंतर-सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है। बदलते वैश्विक परिवेश में भाषा शिक्षण की भूमिका और उससे जुड़े सामाजिक सरोकारों को लेकर यह शोध महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बीएचयू में कर रहे हैं शोध
आपको बता दें कि आलोक उपाध्याय बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के जर्मन अध्ययन विभाग में शोधरत हैं। उनके शोध-निर्देशक डॉ. ओम प्रकाश हैं। अकादमिक क्षेत्र में लगातार सक्रिय आलोक का यह अंतरराष्ट्रीय मंच पर शोध-पत्र प्रस्तुत करने का अवसर उनके शोध कार्य की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। आपको यह भी बता दें कि आलोक उपाध्याय ग्राम अकोढ़ी, भभुआ निवासी श्री मदन उपाध्याय के पुत्र हैं। उनके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध-पत्र प्रस्तुत किए जाने की सूचना के बाद परिवार, शुभचिंतकों और क्षेत्र के लोगों में उत्साह है। परिजनों का कहना है कि यह उपलब्धि न केवल परिवार के लिए बल्कि पूरे कैमूर के लिए गर्व का विषय है। वही उनके बड़े भाई राजेश्वर उपाध्याय, जितेंद्र उपाध्याय एवं वंशीधर उपाध्याय ने आलोक को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि मेहनत, लगन और निरंतर अध्ययन के बल पर आलोक ने जिस मुकाम को हासिल किया है, वह क्षेत्र के अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक है। उन्होंने आलोक के उज्ज्वल भविष्य और शोध के क्षेत्र में निरंतर सफलता की कामना की।
शोध-निर्देशक ने दी शुभकामनाएं
वही आलोक के शोध-निर्देशक डॉ. ओम प्रकाश ने आलोक उपाध्याय एवं स्मृति राज को अंतरराष्ट्रीय अकादमिक मंच पर शोध-पत्र प्रस्तुत करने के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध प्रस्तुत करना किसी भी शोधार्थी के अकादमिक सफर में महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। ऐसे मंच शोधार्थियों को अपने शोध को व्यापक वैश्विक समुदाय के सामने रखने और विभिन्न देशों के शोधकर्ताओं के साथ अकादमिक संवाद का अवसर प्रदान करते हैं। वहीं डॉ. सत्य प्रकाश ने भी दोनों शोधार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर शोध-पत्र प्रस्तुत करने का अवसर उनके अकादमिक जीवन में नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह उपलब्धि दोनों शोधार्थियों को भविष्य में और बेहतर एवं उपयोगी शोध कार्य करने के लिए प्रेरित करेगी।
कैमूर की प्रतिभा की अंतरराष्ट्रीय पहचान
आपको बताते हुए चलें कि आलोक उपाध्याय की यह उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है जब छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों से निकलकर युवा शिक्षा, शोध और अकादमिक क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। वही भभुआ जैसे छोटे शहर से निकलकर बीएचयू में शोध करना और फिर वियतनाम के अंतरराष्ट्रीय मंच पर शोध-पत्र प्रस्तुत करना क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणादायक संदेश है। आपको बता दें कि वही 11 सितंबर को वियतनाम में होने वाली इस प्रस्तुति पर कैमूर की निगाहें रहेंगी। अंतरराष्ट्रीय मंच पर आलोक उपाध्याय और स्मृति राज अपने शोध के माध्यम से जर्मन भाषा शिक्षण और उससे जुड़े सामाजिक-सांस्कृतिक विषयों पर विमर्श को आगे बढ़ाएंगे। इस उपलब्धि से भभुआ और कैमूर का नाम भी अंतरराष्ट्रीय अकादमिक जगत में दर्ज होगा।


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