गया कॉलेज शिक्षक संघ ने जनरल कंडीशन स्टेच्यूट पर जताई आपत्ति

सेवा शर्तों, मूल्यांकन और अवकाश संबंधी प्रावधानों पर पुनर्विचार की मांग

ब्यूरो चीफ प्रेम कुमार की रिपोर्ट 

गयाजी। गया कॉलेज शिक्षक संघ की ओर से बुधवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न विभागों के प्राध्यापकों ने भाग लिया। बैठक में राज्यपाल सचिवालय द्वारा जारी जनरल कंडीशन स्टेच्यूट के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई। शिक्षकों ने कहा कि स्टेच्यूट में कई बिंदु स्वागत योग्य हैं, लेकिन कुछ प्रावधानों में स्पष्टता का अभाव है, जिन पर पुनर्विचार किया जाना आवश्यक है।

शिक्षकों ने विशेष रूप से सेवा अनुबंध, स्व-मूल्यांकन रिपोर्ट और प्रोबेशन अवधि से जुड़े प्रावधानों पर चिंता जताई। बैठक में कहा गया कि प्रोबेशन अवधि समाप्त होने से तीन माह पूर्व स्व-मूल्यांकन रिपोर्ट जमा करने का प्रावधान है तथा रिपोर्ट यथासंगत नहीं पाए जाने पर सेवा समाप्ति की बात कही गई है। शिक्षकों को रिपोर्ट देने से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन स्टेच्यूट में यह स्पष्ट होना चाहिए कि सेवा स्थायीकरण या प्रोबेशन के दौरान शिक्षक के किन निर्धारित कार्यों, दायित्वों और मानकों के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा।

शिक्षकों ने कहा कि अस्पष्ट मूल्यांकन व्यवस्था भ्रष्टाचार और मनमानी को बढ़ावा दे सकती है। इससे विश्वविद्यालय के अधिकारी सेवा स्थायीकरण, पदोन्नति और अन्य मामलों में शिक्षकों को अनावश्यक रूप से परेशान कर सकते हैं। इसलिए मूल्यांकन के लिए स्पष्ट, पारदर्शी और वस्तुनिष्ठ मानक निर्धारित किए जाने चाहिए।

बैठक में डीएचई (DHE) के पद सृजन के प्रावधान पर भी सवाल उठाया गया। शिक्षकों ने कहा कि जब कुलपति, कुलसचिव और राज्यपाल सचिवालय की व्यवस्था पहले से मौजूद है, तो डीएचई के पद की आवश्यकता और उसकी प्रशासनिक भूमिका को स्पष्ट किया जाना चाहिए। कुलसचिव द्वारा डीएचई को रिपोर्ट करने की व्यवस्था को भी शिक्षकों ने तर्कसंगत बनाने की मांग की।

इसके अलावा पदोन्नति, कम्यूटेड लीव, आकस्मिक अवकाश, पितृत्व अवकाश सहित अन्य अवकाशों से जुड़े प्रावधानों पर भी चर्चा हुई। शिक्षकों का कहना था कि कई प्रावधानों में अतिरिक्त शर्तें जोड़कर व्यवस्था को जटिल बना दिया गया है। इन सभी बिंदुओं पर व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाना चाहिए।

शिक्षक संघ ने आरोप लगाया कि सरकार बिना व्यापक शिक्षक समुदाय से विचार-विमर्श किए विश्वविद्यालयों से संबंधित नीतियां लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। शिक्षकों ने कहा कि विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 को भी इसी तरह बिना पर्याप्त विचार-विमर्श के लाने की तैयारी की गई थी, लेकिन लगातार विरोध के बाद सरकार को पीछे हटना पड़ा। अब राजभवन सचिवालय के माध्यम से विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की स्वायत्तता एवं अधिकारों को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है, जो स्वीकार्य नहीं है।

बैठक में गया कॉलेज शिक्षक संघ की अध्यक्ष प्रो. विभा सिंह, सचिव डॉ. आनंद कुमार, कोषाध्यक्ष डॉ. पन्ना लाल, सदस्य डॉ. मार्कंडेय पांडे, डॉ. अनूप कुमार, परीक्षा नियंत्रक डॉ. सोम नाथ, पीआरओ डॉ. राजेश मिश्र सहित रसायन, गणित, पाली, राजनीति शास्त्र एवं अन्य विभागों के प्राध्यापक उपस्थित थे।

रिपोर्टर

संबंधित पोस्ट