1.25 करोड़ की लागत से सोख्ता निर्माण पर उठे सवाल, वित्तीय अनियमितता का आरोप

प्रखंड प्रमुख ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर उठाया सवाल तो प्रखंड विकास पदाधिकारी ने मीडिया की सवालों की जबाब देने से किया इनकार

संवाददाता रूपेश कुमार दुबे की रिपोर्ट 

कैमूर------ जिले के रामपुर प्रखंड में करीब 1 करोड़ 25 लाख रुपये की लागत से कराए गए सोख्ता निर्माण कार्य को लेकर वित्तीय अनियमितता और निर्माण में गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं। योजना के तहत कराए गए कार्यों में प्राक्कलन और निर्धारित मानकों की अनदेखी किए जाने का आरोप लगाया जा रहा है। मामला सामने आने के बाद अब जांच रिपोर्ट का इंतजार है।

बताया जा रहा है कि बीते दिनों रामपुर प्रखंड पंचायत समिति की बैठक में प्रखंड प्रमुख घूरा यादव ने सोख्ता निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर कड़ा विरोध जताया था। प्रखंड प्रमुख का आरोप था कि कई स्थानों पर सोख्ता निर्माण में प्राक्कलन राशि के अनुरूप कार्य नहीं कराया गया है, और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

प्रखंड प्रमुख घूरा यादव ने यहां तक दावा किया था कि यदि रामपुर प्रखंड में 50 प्रतिशत भी सोख्ता का निर्माण निर्धारित मानकों के अनुसार हुआ है, तो वह अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। उनके इस बयान के बाद सोख्ता निर्माण योजना को लेकर मामला और चर्चा में आ गया।

जानकारी के अनुसार, मामले की जांच के लिए रामपुर प्रखंड के तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा एक जांच कमेटी गठित की गई थी। हालांकि, अभी तक जांच कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आई है। ऐसे में करीब 1.25 करोड़ रुपये की योजना में वास्तव में कितना निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार हुआ और कितने कार्यों में कथित अनियमितता हुई, इसे लेकर सवाल बने हुए हैं।

वहीं प्रखंड प्रमुख घूरा यादव ने मीडिया के सामने एक बार फिर सोख्ता निर्माण कार्य में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया और निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर अपनी बात रखी।

दूसरी ओर, जब मीडिया कर्मियों ने इस पूरे मामले को लेकर रामपुर प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी से जानकारी लेने और उनका पक्ष जानने का प्रयास किया, तो उन्होंने मीडिया को बयान देने से इनकार कर दिया।

बताया जाता है कि इस मामले में जानकारी लेने के लिए दूरभाष के माध्यम से भी प्रखंड विकास पदाधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन बैठक में होने का हवाला देकर कॉल काट दिए जाने की बात सामने आती रही है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

वहीं, सूत्रों की माने तो कुछ स्थानों पर एक ही सोख्ता निर्माण पर दो-दो या तीन-तीन बार जिरो टैग किए जाने की बात सामने आई है। यदि ऐसा हुआ है तो यह जांच का महत्वपूर्ण बिंदु हो सकता है। हालांकि, इस आरोप की भी आधिकारिक पुष्टि जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही हो सकेगी।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि करीब 1 करोड़ 25 लाख रुपये की इस योजना के तहत वास्तव में कितने सोख्तों का निर्माण कराया गया? क्या सभी निर्माण कार्य प्राक्कलन और निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप हुए हैं? क्या कहीं एक ही निर्माण कार्य की दोबारा या बार-बार जिरो टैगिंग की गई? और यदि जांच में वित्तीय या तकनीकी अनियमितता की पुष्टि होती है, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई की जाएगी?

फिलहाल पूरे मामले में जांच रिपोर्ट का इंतजार है। जांच कमेटी की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सोख्ता निर्माण योजना में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और निर्माण कार्य में वास्तव में कोई वित्तीय या तकनीकी अनियमितता हुई है या नहीं।

अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, क्योंकि रिपोर्ट सामने आने के बाद ही करीब 1.25 करोड़ रुपये की इस योजना की वास्तविक स्थिति और जिम्मेदारी तय होने की तस्वीर साफ हो सकेगी।

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