सासाराम में 2 सड़क हादसे, 1 मौत, कई घायल — कब सुधरेगा ट्रैफिक सिस्टम?
- सुनील कुमार, जिला ब्यूरो चीफ रोहतास
- Jul 04, 2025
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रोहतास। जिला मुख्यालय सासाराम के गौरक्षणी की सुबह ने छीनी एक ज़िंदगी: कोचिंग जाते युवक को ट्रक ने कुचला सासाराम के गौरक्षणी मोहल्ले में शुक्रवार सुबह सड़क पर खून बिखर गया। महावीर मंदिर के पास एक ट्रक ने बाइक सवार 20 वर्षीय गौरव कुमार को कुचल दिया। गौरव, करमडिहरी गांव का निवासी था और रोज़ की तरह कोचिंग जा रहा था। लेकिन इस बार वह लौट न सका। ट्रक चालक मौके से फरार हो गया। गुस्साए लोगों ने सड़क जाम कर दिया और SP को बुलाने, पीड़ित परिवार को मुआवज़ा देने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। करीब दो घंटे बाद सदर SDM आशुतोष रंजन और DSP वन दिलीप कुमार ने हालात को संभाला और आश्वासन के बाद जाम हटाया गया।
नियमों की धज्जियां उड़ती रहीं, शहर देखता रहा
शहर में सुबह 7 बजे से रात 8 बजे तक भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक है। इसके बावजूद ट्रक शहर में बेरोकटोक प्रवेश करते हैं। सवाल उठता है कि ऐसे नियमों का क्या अर्थ जब पालन ही नहीं होता? एसडीएम ने बताया कि, "पीड़ित परिवार को मुआवज़ा दिया जाएगा और ट्रक के नो-एंट्री क्षेत्र में प्रवेश के लिए जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी।"
NH-19 पर टमाटर लदी पिकअप में लगी आग, तीन लोग घायल
सासाराम से कुछ किलोमीटर दूर धौड़ाड थाना क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-19 पर एक और सड़क हादसे ने लोगों को दहला दिया। डेहरी से सासाराम जा रही टमाटर लदी पिकअप वाहन ताराचंडी के पास एक ट्रक से टकरा गई और उसमें आग लग गई।
इस भीषण हादसे में पिकअप चालक समेत तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों की पहचान कैमूर जिले के मोहनिया थाना क्षेत्र के सुनील कुमार (30), अभिषेक कुमार (34) और शालू कुमार (33) के रूप में हुई है।
एनएचएआई की तत्परता से तीनों को जली हुई पिकअप से बाहर निकाला गया और ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने दो घायलों को गंभीर स्थिति में बाहर रेफर कर दिया, जबकि एक का इलाज सासाराम सदर अस्पताल में जारी है। धौड़ाड थाना पुलिस ने दोनों वाहनों को ज़ब्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
सड़कें सिर्फ रास्ते नहीं, अब जानलेवा जोखिम बन चुकी हैं
दोनों घटनाएं एक ही दिन, एक ही शहर सासाराम में हुईं — लेकिन इनके पीछे कहानी एक ही है: ट्रैफिक नियमों की अनदेखी, पब्लिक में जागरूकता कि कमी, आम लोगो की लापरवाही, ट्रैफिक प्रशासन की ढील और व्यवस्था की विफलता।
जब तक नियमों को लागू करने की इच्छाशक्ति नहीं होगी, ऐसी घटनाएं सिर्फ खबर नहीं, किसी परिवार की ज़िंदगी तबाह करती रहेंगी। सवाल यह नहीं है कि दोषी कौन है, सवाल यह है कि हमारी सड़कें कब सुरक्षित होंगी?


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