बस के नीचे आने से छात्र की हुई दर्दनाक मौत, ड्राइवर बस लेकर भागा

शुजालपुर । शहर के पचोर रोड स्थित ग्राम चितौड़ा में आज एक दर्दनाक हादसे में सरस्वती शिशु मंदिर शुजालपुर सिटी की स्कूल बस से उतरते समय नर्सरी का छात्र कुनाल जाटव (5 वर्ष) बस के पहिए की चपेट में आ गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। यह हादसा न सिर्फ एक मासूम की जान ले गया, बल्कि स्कूल प्रबंधन, पुलिस और प्रशासन की घोर लापरवाही को भी उजागर कर गया।

बस में मौजूद नहीं था अटेंडर

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस में कोई अटेंडर मौजूद नहीं था, जबकि शासन द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि हर स्कूल बस में बच्चों की सुरक्षा के लिए एक प्रशिक्षित अटेंडर होना चाहिए। स्कूल की छुट्टी के बाद जब बस ग्राम चितौड़ा पहुंची, तो सबसे पहले कुनाल का जुड़वां भाई सम्राट उतरा, और जैसे ही कुनाल बस से नीचे उतर रहा था, ड्राइवर ने बिना ध्यान दिए बस आगे बढ़ा दी। मासूम पूरी तरह बस से नीचे नहीं उतर पाया और उसका पेट बस के पिछले पहिए के नीचे आ गया। उसे तत्काल एक निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।

पीड़ित परिवार ने बताया कि चार दिन पहले ही कुनाल और उसके भाई का सरस्वती शिशु मंदिर में एडमिशन कराया गया था। यह दोनों भाइयों का स्कूल में पहला ही सप्ताह था। दर्दनाक बात यह है कि कुनाल का जन्मदिन आगामी 4 अगस्त को था, लेकिन अब वह दिन उसके परिजनों के लिए शोक का दिन बन गया है।

थाना प्रभारी का गैर जिम्मेदाराना बयान

घटना के तुरंत बाद ड्राइवर बस लेकर मौके से फरार हो गया। परिजनों ने ड्राइवर और बस की पहचान संबंधी सभी जानकारी पुलिस को सौंप दी, लेकिन पुलिस ने अब तक न तो बस जब्त की और न ही ड्राइवर की गिरफ्तारी की। मीडिया द्वारा "बस कहां है"

पूछे जाने पर सिटी थाना प्रभारी प्रवीण पाठक ने बेहद गैर-जिम्मेदाराना जवाब देते हुए कहा  FIR दर्ज कर ली गई है, बस बच्चों को छोड़ने गई है। यह वही बस थी जिससे एक मासूम की मौत हुई और पुलिस अब तक सिर्फ उसके लौटने का इंतज़ार करती नजर आई।

SDOP ने दी थी समझाइश

सबसे हैरानी की बात यह है कि कुछ दिन पूर्व ही अनुविभागीय अधिकारी पुलिस (SDOP) निमिष देशमुख द्वारा स्कूल संचालकों और वाहन चालकों की बैठक लेकर स्कूल बसों की सुरक्षा को लेकर शासन के नियमों की जानकारी दी गई थी। सभी स्कूलों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अटेंडर की नियुक्ति की जाए, ड्राइवरों को प्रशिक्षित किया जाए, और मानक नियमों का पालन किया जाए। बावजूद इसके सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल द्वारा इन नियमों की खुली अवहेलना की गई, जिसका परिणाम एक मासूम की जान जाने के रूप में सामने आया।

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