
बिना नियम और कानून के चलती है स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था है
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, ब्यूरो चीफ कैमूर
- Aug 23, 2025
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सूत्रों की माने तो जिन अवैध स्वास्थ्य संस्थानों से स्थानीय चिकित्सा प्रभारी या पदाधिकारियों को तय शुदा रकम प्राप्त होती हैं अनदेखी करना परमधर्म है, पर जहां से कुछ प्राप्त नहीं होता है उसे पकड़कर अपनी उपलब्धियां भी दिखाने में परहेज नहीं
संवाददाता श्याम सुन्दर पांडेय की रिपोर्ट
दुर्गावती (कैमूर)-- प्रखंड सहित जिला, प्रदेश व देश में स्वास्थ्य विभाग के अंदर न जांच की फीस का नियम तय है, न डॉक्टर की फीस के लिए कोई नियम और कानून बना है और ना ही शरीर के किस अंग के ऑपरेशन का कितना पैसा लेना है इस पर भी कोई कानून बना है। देश में नागरिकों के जिंदगी के साथ स्वास्थ्य विभाग के इस तरह के अनदेखी के कारण कितनी जिंदगियां या तो अपंग हो जाती है, या तो काल के गाल में समा जाती हैं। गांव और देहातो में झोलाछाप डॉक्टरों की संख्या बढ़ गई है-
और बिना सर्जन के ऑपरेशन आए दिन झोलाछाप डॉक्टरों के अस्पतालों में दिखाई देता है। राष्ट्रीय राजमार्ग हो या साइड मार्ग जहां भी देखो अस्पताल ही अस्पताल दिखाई देगा जिसमें बिना ऑपरेशन थिएटर के ऑपरेशन भी हो रहे हैं, और बिना लाइसेंस के दवा भी बिक रही हैं। जिले में बैठे या प्रदेश में बैठे अधिकारी कभी भी अपनी गाड़ी को उठाकर रोड किनारे चिकित्सालयों की निगरानी करते नहीं देखे जाते और यदि रास्ते से गुजरते हैं तो अपनी आंखों को नीचे करके चले जाते हैं। बिना प्रशिक्षण प्राप्त किया जांच केंद्र भी जगह-जगह खुल चुके हैं, जिसमें मनमाने ढंग से जांच का पैसा और वसूला जा रहा है। कोई एक ही किस्म के जांच का कहीं कुछ पैसा लिया जाता है तो कहीं कुछ जांच का कुछ फीस लिया जाता है। यही नहीं समान डिग्री धारी डॉक्टर का भी वही हाल है, कोई डॉक्टर अपना फीस अपने मनमाने ढंग से कुछ तय किया है तो कोई कुछ यह सब क्या हो रहा है, इस लोकतांत्रिक देश में न खाता न बही जो डॉक्टर कहे वही सही रोगी से जितना चाहो उतना फीस और पैसा वसूल लो जितना चाहो उतना जांच का पैसा ले लो इसलिए की वह तो मजबूर है। सरकार को चाहिए कि डिग्री धारी डॉक्टर का भी फीस निर्धारित हो जांच का भी फीस निर्धारित हो और किस अंग का ऑपरेशन का फीस क्या होगा वह भी अस्पताल के बोर्ड पर लिखा होना चाहिए, ताकि जनता को सुविधा मिल सके और बेबस लाचार जिंदगियों को बचाया जा सके। वही सूत्रों की माने तो जिन अवैध स्वास्थ्य संस्थानों से स्थानीय चिकित्सा प्रभारी या पदाधिकारियों को तय शुदा रकम मिलती है वहां अनदेखी करना इनकी परमधर्म बन गया है, पर जहां से कुछ प्राप्त नहीं होता है उसे पकड़कर अपनी उपलब्धियां भी दिखाने में परहेज नहीं है।
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