गणपति विसर्जन के कृत्रिम तालाब बने ‘केकड़ा बाजार’, पालिका और ठेकेदार की लापरवाही उजागर
- महेंद्र कुमार (गुडडू), ब्यूरो चीफ भिवंडी
- Aug 29, 2025
- 324 views
भिवंडी। शहर में गणपति विसर्जन की व्यवस्था को लेकर पालिका प्रशासन और ठेकेदार की लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है। विसर्जन के दूसरे दिन भिवंडी मनपा द्वारा बनाए गए एक कृत्रिम तालाब में गणेश भक्तों के बजाय केकड़ा पकड़ने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी। यह नजारा न केवल प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि पूरे तंत्र की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े करता है।
गौरतलब है कि इस वर्ष भिवंडी मनपा ने गणेश विसर्जन के लिए 10 कृत्रिम तालाब तैयार करने का जिम्मा ठेकेदार मिलिंद मुंडे को सौंपा था। इस काम के लिए पर्यावरण विभाग की ओर से ठेकेदार को 18 लाख रुपये का ठेका दिया गया था। हकीकत यह है कि इन 10 में से केवल 7 तालाब ही समय पर तैयार हो सके। शेष तालाबों में पानी लीक हो गया या फिर ठेकेदार पानी ही नहीं भर सका। नतीजतन भक्तों को विसर्जन के लिए अन्य विकल्प ढूंढने पड़े।
सबसे चौंकाने वाली तस्वीर कामवारी नदी तट किनारे तिलक घाट पर बने कृत्रिम तालाब की सामने आई, जहां विसर्जन के दूसरे दिन से ही तालाब में बड़ी संख्या में केकड़े दिखाई दिए। इसकी खबर फैलते ही स्थानीय युवक तालाब में कूदकर केकड़े पकड़ने लगे। सवाल यह है कि जिस तालाब में गणपति बप्पा का विसर्जन हुआ या होना था, वह अगले ही दिन ‘केकड़ा बाजार’ कैसे बन गया ? नागरिकों का कहना है कि यह घटना न केवल श्रद्धालुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है, बल्कि पालिका प्रशासन और ठेकेदार की गंभीर लापरवाही भी है। करोड़ों के बजट वाली मनपा ने 18 लाख रुपये खर्च करने के बाद भी श्रद्धालुओं को उचित विसर्जन स्थल उपलब्ध नहीं करवाया।
दक्ष नागरिकों की माने तो उन्होंने कहा कि अब देखना यह है कि क्या पालिका प्रशासन ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करता है या फिर इस बार भी पूरा मामला ‘ढाक के तीन पात’ बनकर रह जाएगा।


रिपोर्टर