जिस मुख से होती थी प्रशंसा उसी मुख से सुनने को मिलेगी शिकायतें

 संवाददाता श्याम सुंदर पांडेय की लेखनी से 

दुर्गावती (कैमूर)-- बिहार विधानसभा का चुनाव  ज्यों ज्यों नजदीक आते जा रहा है बिहार के राजनेताओं के शोरूम से पार्टियां बदलने का क्रम तेजी से चल रहा है और दूसरे पार्टियों के शोरूम को सजाते हुए राजनेता दिख रहे हैं। अब ग्रामीण दौरों के दौरान दल बदलने वाले राजनेता जिन मुख से कभी पार्टियों की प्रशंसा करते थे आज उन्हीं मुख से पार्टियों के निंदा करते दिखाई दे रहे हैं और देंगे।  यही नहीं जिस दल को छोड़कर आए हैं उस दल के काम को  अपना काम बता रहे है। लेकिन आश्चर्य है उस क्षेत्र की जनता को जो ऐसे राजनेताओं को अपना नेता मानकर फिर उसके साथ क्षेत्र का भ्रमण करते दिखाई दे रही है। जिस दल के नेताओं के गले में माला पहनाते थे फिर दल बदलने वाले उसी को आज गली और अभद्र भाषा का प्रयोग करते नजर आरहे हैं।ऐसे नेताओं के चाल और चरित्र को जनता को परखने और समझने की जरूरत है। लेकिन क्या कहा जाए जातिवाद के उन्मत लोग इन सब बातों पर ध्यान नहीं देते हैं और वैसे दल बदलू नेताओं के साथ जुड़कर आम जनता को भ्रमित करने का काम करते है। संविधान में संशोधन तो बहुत हुए लेकिन राजनीति में इन सब गंदे खेलों पर संशोधन कब होगा और कब बनेगा कानून जिससे देश की भोली भाली जनता को ठगने का काम बंद किया जा सके। आने वाले भविष्य में संशोधन होने की कोई उम्मीद भी नजर नहीं आ रही है। क्योंकि सारे दल में तो ऐसे ही लोग भरे हुए हैं कभी इस दल में तो कभी उस दल में और ऐसे नेताओं का शिकार देश की जनता हो रही और होती रहेगी। इसलिए देश की जनता को सतर्क होने की जरूरत है ताकि हर दल के नेताओं के इस खेल को समझा जा सके। ऐसे नेताओं को चुनावी रणनीति से जनता को जवाब देना चाहिए ताकि आने वाले भविष्य में राजनेता ऐसा न कर सके। लेकिन जनता को इस तरह से जातियों में बांट दिया गया है कि उसको अपना हित दिखाई ही नहीं देता।

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