भिवंडी में साइजिंग कंपनियों से बढ़ता प्रदूषण, स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा

आंखों में जलन व सांस संबंधी बीमारियों की आशंका, एमपीसीबी से कार्रवाई की मांग


भिवंडी। शहर में संचालित साइजिंग और डाइंग कंपनियों द्वारा नियमों की खुलेआम अनदेखी किए जाने से गंभीर वायु और जल प्रदूषण का खतरा बढ़ता जा रहा है। आरोप है कि करीब 150 से अधिक साइजिंग कंपनियों में बॉयलर के ईंधन के रूप में रबर, चिंद्दी, कपड़ा, कागज और लकड़ी जैसे प्रतिबंधित पदार्थ जलाए जा रहे हैं, जिससे जहरीला धुआं फैल रहा है। इससे आसपास के रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इस मामले को लेकर स्थानीय निवासी जावेद खान ने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (एमपीसीबी) को लिखित शिकायत देकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। शिकायत के साथ एक साइजिंग कंपनी में जमा किए गए रबर, चिंद्दी और लकड़ी की तस्वीरें भी संलग्न की गई हैं।

शिकायत पत्र में बताया गया है कि भिवंडी मनपा हद्दी के प्रभाग क्रमांक-4, भंडारी रोड पर टावरे पुलिस चौकी के सामने स्थित फिरदौस साइजिंग कंपनी में लंबे समय से बॉयलर में प्रतिबंधित ईंधन का इस्तेमाल किया जा रहा है। आरोप है कि कंपनी में ईटीपी (एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) की समुचित व्यवस्था नहीं है और उत्पादन प्रक्रिया से निकलने वाला रसायनयुक्त पानी व धुआं बिना शुद्धिकरण के खुले में छोड़ा जा रहा है। इससे जमीन और भूजल के प्रदूषित होने का खतरा बढ़ गया है। जावेद खान का कहना है कि बॉयलर में रबर और चिंद्दी जलाने से निकलने वाला जहरीला धुआं आसपास के रिहायशी इलाकों में फैल रहा है। इसके चलते दमा, सांस की बीमारियां, आंखों में जलन, त्वचा रोग और एलर्जी के मामलों में वृद्धि हो रही है। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव देखा जा रहा है।खान ने यह भी आरोप लगाया कि इस संबंध में 24 नवंबर को भी प्रदूषण नियंत्रण विभाग को शिकायत दी गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे कल्याण स्थित प्रदूषण नियंत्रण अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। उनका कहना है कि निरीक्षण केवल औपचारिकता बनकर रह गया है, जबकि प्रदूषण फैलाने वाली साइजिंग कंपनियां बेखौफ होकर काम कर रही हैं। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि प्रदूषण फैलाने वाली साइजिंग और डाइंग कंपनियों के खिलाफ तत्काल जांच कर उन्हें बंद किया जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि क्षेत्रवासियों को प्रदूषण से राहत मिल सके। फिलहाल इस मामले में महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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