पैक्स की मनमानी से किसान बेबस,डीएम के लक्ष्य देने के बावजूद पैक्स की मनमानी जारी

जिला संवाददाता संदीप कुमार की रिपोर्ट 

भभुआं (कैमूर)-- राज्य सरकार और जिला प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद कैमूर जिले में धान अधिप्राप्ति (खरीद) की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। ताजा मामला भभुआ प्रखंड के मोकरी गांव का है, जहां एक किसान ने पैक्स की मनमानी से तंग आकर जिलाधिकारी (डीएम) से न्याय की गुहार लगाई है। मोकरी गांव निवासी किसान ओंकारनाथ सिंह ने जिलाधिकारी कैमूर को लिखित आवेदन देकर अवगत कराया है कि व्यापार मंडल सहकारिता पैक्स द्वारा उनका धान नहीं खरीदा जा रहा है। किसान ने अत्यंत भावुक होते हुए कहा कि "धान ही हमारी एकमात्र पूंजी है, जो वर्तमान में खलिहान में खुले आसमान के नीचे रखा हुआ है।" उन्होंने बताया कि बारिश की संभावना जताई गई है। अगर ऐसे में बारिश हो जाती है, तो उनकी पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी और साल भर की मेहनत पर पानी फिर जाएगा। किसान ओंकारनाथ सिंह ने अपने आवेदन में स्पष्ट किया है कि उनकी जमा पूंजी और आय का एकमात्र जरिया यही धान है। यदि समय रहते धान की सरकारी खरीद नहीं हुई, तो उनके परिवार के सामने भूखमरी की नौबत आ जाएगी। उन्होंने जिलाधिकारी से मांग की है कि पैक्स को अविलंब धान खरीदने का निर्देश दिया जाए ताकि उन्हें आर्थिक तबाही से बचाया जा सके।

गौरतलब है कि जिलाधिकारी कैमूर ने पिछले दिनों सभी पैक्सों और व्यापार मंडलों को धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य निर्धारित कर जल्द से जल्द खरीदारी शुरू करने का कड़ा निर्देश दिया था। सरकार का उद्देश्य है कि किसानों को बिचौलियों के हाथों औने-पौने दाम पर फसल न बेचनी पड़े। इसके बावजूद, धरातल पर पैक्स अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं। कई किसानों का आरोप है कि पैक्स अध्यक्ष और संबंधित अधिकारी खरीदारी में टालमटोल कर रहे हैं, जिससे आम किसान दर-दर भटकने को मजबूर है।

नियमों के मुताबिक, पैक्स को पंजीकृत किसानों से प्राथमिकता के आधार पर धान की खरीद करनी है। लेकिन मोकरी गांव का यह मामला दर्शाता है कि प्रशासन की सख्ती के बाद भी व्यवस्था में कहीं न कहीं खोट है।

अब देखना यह होगा कि जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद क्या पीड़ित किसान का धान खरीदा जाता है?

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