यूजीसी कानून के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे सामाजिक संगठन के कार्यकर्ता - अखिलेश

देश में विभाजन का काम करेगा नया कानून 

ग्वालियर(मध्यप्रदेश)-- सरकार द्वारा शिक्षण संस्थानों में लागू किया यूजीसी कानून देश में अराजकता का माहौल बनाएगा। जहां विद्यार्थी आपसी भेदभाव को भूलकर शिक्षा ग्रहण करते हैं, वहीं इस कानून ने आरक्षित और अनारक्षित वर्ग में विभाजन कर नफरत का जहर घोल दिया है। यह जानकारी आरक्षण विरोधी मोर्चा के संस्थापक अध्यक्ष अखिलेश पांडेय ने प्रेस विज्ञप्ति में दी। उन्होंने कहा कि अपने राजनीतिक फायदे के लिए जहां किसी भी परीक्षा में प्रवेश के लिए एक न्यूनतम अंकों की आवश्यकता होती है, वहीं मेडिकल कॉलेज की सबसे बड़ी परीक्षा न्यूनतम अंकों की बाध्यता को हटाकर शून्य से भी काम अंक पर एक वर्ग विशेष के छात्रों को प्रवेश देकर जो योग्यता का चीर हरण किया है, शायद ऐसा कहीं नहीं होता। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में नए यूजीसी एक्ट के तहत जो कानून बनाया है, उसमें सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों पर यदि ओबीसी और एससी एसटी के छात्र किसी भी प्रकार का आरोप लगाते हैं, तो उन्हें कड़े दंड का प्रावधान रखा है। वहीं यदि शिकायतकर्ता की शिकायत झूठी पाई जाती है तो उस पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। सरकार के इस काले कानून के विरोध में सवर्ण समाज के विभिन्न संगठनों से मिलकर जल्द ही एक आंदोलन किया जाएगा। इस कानून को वापस लेने के लिए सड़क पर भी उतरेंगे। पांडे का कहना है कि हम अपना तो बलिदान दे सकते हैं, लेकिन आने वाली पीढ़ी  के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे। इस आंदोलन को जीवित करने के लिए यदि मुझे 1990 जैसा कदम उठाना पड़ा तो मैं कतई पीछे नहीं हटूंगा। इस आंदोलन के लिए देश के सभी संगठनों से संपर्क कर नई रणनीति बनाई जाएगी।

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