भिवंडी महापौर चुनाव से पहले भाजपा में हलचल,नारायण चौधरी का बगावती रुख

13 नगरसेवकों के साथ सेकुलर फ्रंट की ओर झुकाव

भिवंडी। भिवंडी निजामपुर शहर महानगरपालिका में 20 फरवरी को होने वाले महापौर चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में अचानक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पार्टी द्वारा अधिकृत महापौर उम्मीदवार बदलने के फैसले से नाराज पूर्व घोषित उम्मीदवार नारायण चौधरी ने बगावती तेवर अपनाते हुए अलग खेमे की तैयारी शुरू कर दी है। उन्होंने दावा किया है कि भाजपा के  22 नगरसेवकों में से 13 नगरसेवक उनके साथ हैं और वे सेकुलर फ्रंट के साथ आगे बढ़ने पर विचार कर रहे हैं।

दरअसल, भाजपा भिवंडी शहर जिला अध्यक्ष रविकांत सावंत ने एक आधिकारिक पत्र जारी कर सभी नगरसेवकों को सूचित किया कि आगामी महापौर चुनाव में अब सौ.स्नेहा मेहुल पाटिल पार्टी की अधिकृत उम्मीदवार होंगी। इस निर्णय के बाद पहले घोषित उम्मीदवार नारायण चौधरी ने पत्रकार परिषद आयोजित कर अपनी नाराजगी जाहिर की। पत्रकारों से बातचीत में चौधरी ने कहा कि पार्टी ने उन्हें टिकट दिया, जिसके आधार पर वे चुनाव जीतकर नगरसेवक बने और बाद में पार्टी ने ही उन्हें महापौर पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार घोषित किया था। उन्होंने बताया कि इसी आधार पर उन्होंने महापौर चुनाव के लिए नामांकन भी किया था। हालांकि अब अचानक उनका नाम बदलकर स्नेहा मेहुल पाटिल को अधिकृत उम्मीदवार बनाए जाने से वे और उनके समर्थक आहत हैं। चौधरी ने कहा कि इस फैसले के चलते वे भाजपा के 13 नगरसेवकों के साथ मिलकर सेकुलर फ्रंट की ओर अग्रसर होने का निर्णय ले रहे हैं। इससे महापौर चुनाव से पहले शहर की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना बढ़ गई है। गौरतलब है कि कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) और समाजवादी पार्टी ने मिलकर सेकुलर फ्रंट का गठन किया है और महापौर पद पर दावा ठोका है। कांग्रेस को 30 सीटें, राकांपा (शरद) को 12 सीटें और समाजवादी पार्टी को 6 सीटों पर जीत मिली है। इस आधार पर फ्रंट 42 सीटों का समर्थन होने का दावा कर रहा है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार समाजवादी पार्टी के छह नगरसेवकों ने पहले ही फ्रंट से दूरी बना ली है, जिससे राजनीतिक समीकरण और भी जटिल हो गए हैं। महापौर चुनाव से पहले भाजपा में उभरे इस विवाद और संभावित दल-बदल की स्थिति ने भिवंडी की सियासत को गरमा दिया है। अब सभी की नजरें 20 फरवरी को होने वाले चुनाव और संभावित गठजोड़ों पर टिकी हुई हैं, जो शहर की सत्ता का नया समीकरण तय करेंगे।

रिपोर्टर

संबंधित पोस्ट