मुख में राम बगल में छुरी राजनेताओं के द्वारा जाति आधारित कानून जाति आधारित भाषण का काम आज भी जारी

संवाददाता श्याम सुंदर पाण्डेय की लेखनी से 

दुर्गावती(कैमूर)-- अक्सर मंच से लेकर आए दिन गांव तक सुनने को मिलता है कि जात ब्राह्मणों ने बनाया है लेकिन अब सब मिट रहा है और दिख भी रहा है। गांवो में अक्सर जातिगत मोहल्ले हुआ करते थे लेकिन आज शहरों में सबके मकान एक जगह बन रहे हैं और एक ही मुहल्ले में नए युग का शुरुआत नई इबादत लिख रहा है और एक साथ यात्रा एक साथ खाना एक ही स्कूल में पढ़ना सब शुरू है। तो दूसरी तरफ राजनेताओं के द्वारा जाति आधारित कानून जाति आधारित भाषण का काम आज भी जारी है। यू सी जी जैसे शिक्षण संस्थान में  वह भी 0 - के नीचे मेडिकल विभाग में बहाली करने की राजनीति शुरू हो गई जो पिछली सरकारें करती थी वह अब भाजपा की सरकार भी करने लगी। एक कहावत है मुख में राम बगल में छुरी , कालनेमी भी मुख से राम कहता था लेकिन हनुमान जी की हत्या करने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ा वही हाल आज भाजपा की भी है। जब  काले कानून , रुढ़ वादिता पर आधारित मिटाये जा रहा है तो फिर  ऐसा कानून क्यों। क्या सवणों  को मिटाने की साजिश का यह एक हिस्सा नहीं है।

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