भिवंडी मनपा में महापौर की कुर्सी पर सस्पेंस

‘महायुति के शिवसेना का मेयर’ दावा कर शिवसेना ने बढ़ाया सियासी तापमान


भिवंडी। भिवंडी- निजामपुर शहर महानगरपालिका में महापौर पद को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। महापौर चुनाव की तारीख अभी तक घोषित नहीं होने से राजनीतिक अनिश्चितता बनी हुई है, वहीं अलग-अलग दलों के दावे और बदलते समीकरणों ने सत्ता की जंग को और दिलचस्प बना दिया है। इसी बीच शिवसेना (शिंदे गुट) के पूर्व विधायक रूपेश दादा म्हात्रे के बयान ने राजनीतिक माहौल में नया मोड़ ला दिया है। उन्होंने साफ दावा किया है कि भिवंडी का अगला महापौर महायुति का होगा और शिवसेना का ही उम्मीदवार इस कुर्सी पर बैठेगा।

गौरतलब हो कि 15 जनवरी को संपन्न हुए मनपा चुनाव और 16 जनवरी को घोषित नतीजों ने चौंकाने वाले राजनीतिक समीकरण सामने रखे। कांग्रेस 30 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि भाजपा को 22 सीटें मिलीं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) और शिवसेना (शिंदे गुट) को 12-12 सीटें, समाजवादी पार्टी को 06, कोणार्क विकास आघाडी को 4, भिवंडी विकास आघाडी (एकता मंच) को 3 और एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गई। नतीजों के बाद कांग्रेस, राकांपा और समाजवादी पार्टी ने मिलकर ‘सेक्युलर फ्रंट’ बनाने का दावा करते हुए कांग्रेस का महापौर बनाने की रणनीति बनाई थी। हालांकि समाजवादी पार्टी के विधायक रईस कासम शेख द्वारा चुनाव प्रचार के दरमियान कथित तौर सपा पार्टी के विरोधी में कांग्रेस व राकांपा के लिए प्रचार किया और उनके समर्थकों ने जीत के बाद सपा की साइकिल तोड़कर मजाक उड़ाया। जिसके बाद सपा से विजयी हुए 6 नगरसेवक ने फ्रंट से दूरी बना ली, जिससे सत्ता का गणित फिर उलझ गया। दूसरी तरफ भाजपा ने नारायण चौधरी को मेयर पद के लिए आगे किया है, जबकि पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री कपिल पाटिल के भतीजे सुमित पाटिल की दावेदारी ने पार्टी के भीतर भी हलचल बढ़ा दी है। वहीं कोणार्क विकास आघाडी के पूर्व महापौर विलास आर. पाटिल भी मैदान में सक्रिय हैं।

इसी बीच रूपेश दादा म्हात्रे का बयान राजनीतिक संकेतों से भरपूर माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि ठाणे जिला शिवसेना का ‘बाल किला’ रहा है और जिले की अधिकांश महानगरपालिकाओं में शिवसेना के महापौर चुने जा चुके हैं। उनके मुताबिक उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में भिवंडी में भी शिवसेना का महापौर बनना तय है। अब निगाहें कोंकण आयुक्त के फैसले पर टिकी हैं, जिनकी ओर से महापौर चुनाव की तारीख घोषित होते ही सियासी समीकरण खुलकर सामने आ जाएंगे। फिलहाल सवाल वही है — भिवंडी की सत्ता किसके हाथ जाएगी।

रिपोर्टर

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