भिवंडी में बड़ा खुलासा: 1 मंजिल का ओसी, 12 मंजिल तक इस्तेमाल

पालिका को हर साल लाखों का नुकसान


भिवंडी। भिवंडी-निजामपुरा क्षेत्र में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक इमारत को महज एक मंजिल तक के ‘वापर दाखिला’ (ओसी) की अनुमति होने के बावजूद 12 मंजिल तक उपयोग में लाया जा रहा है। इस कथित अनियमितता के चलते भिवंडी महानगर पालिका को हर साल लाखों रुपये के टैक्स का नुकसान होने का आरोप लगाया गया है।

सामाजिक कार्यकर्ता फहाद अंजुम शेख ने इस पूरे मामले की शिकायत पालिका आयुक्त अनमोल सागर और नगर विकास विभाग को पत्र लिखकर की है। उन्होंने संबंधित इंजीनियर और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।शिकायत के अनुसार, निजामपुरा गांव के सर्वे नंबर 37/0, 38/0, 74/3, 134/अ, 134/ब (भूखंड क्र. 16, सिटी सर्वे नं. 4039) स्थित जमीन पर स्टोन वर्क डेवेलपर्स द्वारा निर्माण कार्य किया गया है। इस प्रोजेक्ट में भागीदार शाहनवाज फारूक अहमद मोमिन सहित अन्य लोगों ने 23 अगस्त 2021 को भिवंडी मनपा से ग्राउंड फ्लोर से 12 मंजिल तक इमारत निर्माण की अनुमति प्राप्त की थी। इसके बाद 31 मार्च 2023 को बिल्डर ने आंशिक रूप से केवल तल मंजिल के 5 गाले और पहली मंजिल के 11 गाले के लिए ही ‘वापर दाखिला’ प्राप्त किया। लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद बिल्डर ने बिना पूर्ण ओसी लिए 12वीं मंजिल तक के फ्लैट और दुकानों की बिक्री व किराए पर देना शुरू कर दिया है। इस अनियमितता के चलते पालिका को मिलने वाले टैक्स राजस्व में भारी नुकसान हो रहा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि पूरी इमारत का वैध रूप से उपयोग होता, तो पालिका को लाखों रुपये का अतिरिक्त कर प्राप्त हो सकता था।

मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। अंजुम शेख के मुताबिक, निर्माण के दौरान जमीन मालिक और बिल्डर ने मिलकर खनिज रॉयल्टी की भी चोरी की है। इस पर तहसीलदार द्वारा कार्रवाई करते हुए 6.20 लाख रुपये का दंड और अवैध खनिज उत्खनन व भराव के लिए 42.89 लाख रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया गया है।

नगरपालिका के उप अभियंता एजाज घोरी ने पुष्टि की कि संबंधित इमारत के लिए अब तक केवल तल मंजिल के 5 गाले और पहली मंजिल के 11 गाले के लिए ही वापर दाखिला जारी किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि 12 मंजिल तक उपयोग किए जाने की शिकायत प्राप्त हुई है, जिसकी जांच की जा रही है। वहीं, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले में पालिका के कुछ अधिकारी और प्रोजेक्ट से जुड़े आर्किटेक्ट वाहिद अहमद अंसारी की मिलीभगत हो सकती है। इसके अलावा, उक्त जमीन पर महसूल विभाग का लगभग 48 लाख रुपये बकाया बताया जा रहा है। बिना ओसी के प्लॉट और दुकानों का उपयोग किए जाने से पालिका प्रशासन को हर साल टैक्स के रूप में भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। अब इस मामले में प्रशासन क्या कार्रवाई करता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह भिवंडी में निर्माण अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही का एक बड़ा उदाहरण साबित हो सकता है।

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