नाली विवाद हत्याकांड मामले में दो सगे भाइयों को उम्रकैद एवं 50000 रूपए की जुर्माना राशि
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- May 18, 2026
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भभुआं व्यवहार न्यायालय एडीजे-3 विनय प्रकाश तिवारी की अदालत का फैसला, जुर्माना राशि भुगतान न करने की स्थिति में छः महीने की अतिरिक्त सजा
संवाददाता रूपेश कुमार दुबे की रिपोर्ट
कैमूर-- व्यवहार न्यायालय भभुआं एडीजे- 3 विनय प्रकाश तिवारी की अदालत ने हत्या के एक चर्चित मामले में दो सगे भाइयों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला रविवार को सुनाया गया। अदालत ने अभियुक्त पंकज राय उर्फ पवन एवं दीपक उर्फ नीरज राय को हत्या के मामले में दोषी पाते हुए सजा सुनाई।
अदालत ने अभियुक्त पंकज राय उर्फ पवन को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत आजीवन कारावास एवं 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने पर छह माह अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं 27 आर्म्स एक्ट के तहत पांच वर्ष कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया।
दूसरे अभियुक्त दीपक उर्फ नीरज राय को भी धारा 302/34 भादवि के तहत आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। जुर्माना अदा नहीं करने पर छह माह अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
मामले के सूचक विनोद कुमार राय ने कुदरा थाना में दर्ज प्राथमिकी में बताया था कि 6 अगस्त 2020 को गांव में नाली से पानी निकासी को लेकर विवाद हुआ था। विवाद के दौरान गाली-गलौज बढ़ गई। आरोप है कि दीपक उर्फ नीरज राय ने अपने भाई पंकज राय को घर से लाइसेंसी दुनाली बंदूक लाने के लिए कहा। इसके बाद पंकज राय बंदूक लेकर पहुंचा और शिवाजी राय को गोली मार दी। गोली लगने से गंभीर रूप से घायल शिवाजी राय को इलाज के लिए वाराणसी ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।
घटना के बाद भागने के दौरान अभियुक्तों की लाइसेंसी दुनाली बंदूक रास्ते में गिर गई थी, जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया था। इस मामले में 7 अगस्त 2020 को कुदरा थाना कांड संख्या 239/2020 दर्ज किया गया था। सेशन ट्रायल संख्या 75/2020 के तहत मामले की सुनवाई चल रही थी।
अपर लोक अभियोजक सतीश कुमार सिंह ने बताया कि गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने दोनों अभियुक्तों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सूचक पक्ष की ओर से अधिवक्ता प्रहलाद सिंह ने पैरवी की, जबकि बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता अजीत कुमार सिंह एवं सुमन कुमार शुक्ला ने पक्ष रखा।
करीब 5 वर्ष 9 माह बाद आए इस फैसले को लेकर इलाके में काफी चर्चा रही।


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