लाखों आरक्षण विरोधियों का कारवां देख सहमी अपराधी भारत सरकार,
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Aug 26, 2026
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अपने ही दलाल को आंदोलनकारियों का नेतृत्वकर्ता घोषित कर, राष्ट्र को कर रही गुमराह
आरक्षण विरोधी राष्ट्र भक्तों से भारत सरकार कर रही छल व कपट
अयोग्यता आरक्षण,एस सी एस टी एक्ट व यूजीसी के विरुद्ध संघर्ष जारी रहेगा - आरक्षण विरोधी राष्ट्रभक्त
नई दिल्ली---- जंतर मंतर पर राष्ट्रहित में अयोग्यता व जातिगत आरक्षण विरोधि राष्ट्रभक्तों का कारवां देख सहमी अपराधी भारत सरकार, आनन फानन में अपने ही दलाल को आंदोलनकारियों का नेतृत्वकर्ता घोषित कर, मिडिया के माध्यम से राष्ट्र को गुमराह कर अपने गुनाहों पर पर्दा डालने को प्रयासरत,तो आरक्षण विरोधी राष्ट्रभक्तों ने कहा अयोग्यता आरक्षण एस सी एस टी व यूजीसी एक्ट समापन तक संघर्ष जारी रहेगा।
आपको बताते चले कि इस्लामीक लुटेरों के आने से पहले भारत राष्ट सोने का चिड़िया हुआ करता था। विभिन्न वर्णों के लोग निवास करते थे, कर्म के अनुसार लोगों को वर्ण में विभाजित किया जाता था। जब लुटेरों ने आक्रमण किया तो राष्ट्र को लूटने की नीयत से सामाजिक विखराव के रूप में जाति का बीज उत्पन्न कर छुआ छुत की जातियां पैदा किया।जिसके बाद अंग्रेजो ने जन्म से जातियां परिभाषित किया जो आज भी संवैधानिक रूप से जारी है। राष्ट्र जब आजाद हुआ तो जो इस्लामीक लुटेरो सहित अंग्रेजी लुटेरों से लूट गए थे, वो दलित पीड़ित शोषित वर्ग के रूप में परिभाषित किए गए। जिन्हें प्रगति की मुख्य धारा में लाने के उद्देश्य से उनके वर्ग के नेतृत्व कर्ताओं द्वारा 10 वर्षों के लिए आरक्षण की मांग किया गया,जिसे संविधान सभा में सम्मिलित सभी वर्गों के प्रतिनिधियों द्वारा सहर्ष स्वीकार किया गया। पर धरातल पर देखा जाए तो 77 वर्ष बीतने के बावजूद भी जो जहां था वही है,आरक्षण का लाभ सिर्फ कुछ चंद परिवारों द्वारा पीढ़ी दर पीढ़ी लिया जाता रहा है,जो आज भी आरंभ है। जब की राष्ट्र के संविधान में यह स्पष्ट किया गया है कि धर्म, जाति, लिंग और क्षेत्र आधारित द्वेष अपराध है,
पर वर्तमान समय को देखा जाए तो राष्ट्र के तथाकथित नेतृत्व कर्ताओं (अपराधी सरकार) द्वारा सत्ता में बने रहने के लिए लिंग, जाति, धर्म व क्षेत्र के आधार पर कानूने सर्वसम्मति से पारित कर समाज में बिखराव उत्पन्न किया जा रहा है, जिससे राष्ट्र गृह युद्ध के कगार पर खड़ी है।
राष्ट्र में एकता अखंडता स्थापित करने के उद्देश्य से सामाजिक संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा जातिगत आरक्षण, एससी एसटी एक्ट, यूजीसी एक्ट जैसे काले कानूनों की समापन हेतु लगातार संघर्ष किया जा रहा है, जो जारी है।
परिणाम स्वरूप जंतर मंतर दिल्ली धरना स्थल पर बैठकर सामाजिक संगठनों द्वारा धरना प्रदर्शन लगातार जारी है। विगत 21 अगस्त को धरना प्रदर्शन का अनुमति मिलने के बावजूद भी लाखों आरक्षण विरोधी राष्ट्र भक्तों का कारवां देख भारत सरकार के होश उड़ गए, और धरना प्रदर्शन के अनुमति को निरस्त कर दिया गया। पर राष्ट्र के कोने-कोने से आए लाखों की संख्या में आरक्षण विरोधी राष्ट्र भक्त जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन के लिए अड़ गए अंततः वैरकेटिंग हटाकर जंतर मंतर पर पहुंच गए। जब तक अधिक संख्या में प्रदर्शनकारी जमे रहे तब तक अपराधी भारत सरकार क प्रशासन मुक् दर्शक बनी रही। रात्रि 8:00 बजे प्रदर्शनकारियों का संख्या कुछ कम हुआ तो भारत माता की जयकारा लगा हनुमान चालीसा पाठ कर रहे राष्ट्रभक्तों पर अपराधी सरकार की प्रशासन द्वारा पीछे से वार किया गया। प्रदर्शनकारियों को जबरदस्ती हटाया गया।
अपने ही दलाल को आंदोलनकारी का नेतृत्वकर्ता घोषित कर सरकार राष्ट्र को कर रही गुमराह
यदि देखा जाए तो जातिगत आरक्षण एससी एसटी एक्ट सहित अन्य जातिवादी काले कानूनों का विरोध राष्ट्रभक्तों द्वारा बरसों से किया जा रहा है। जब जंतर मंतर पर राष्ट्रभक्तों का कारवां भारत सरकार द्वारा देखा गया तो छल व बल की प्रयोग के साथ ही आंदोलनकारी के बीच अपने दलाल 'हर्ष दुबे' को आंदोलनकारियों का नेतृत्वकर्ता घोषित कर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर देशवासियों को गुमराह किया गया।
अयोग्यता आरक्षण, एससी एसटी व यूजीसी एक्ट के विरुद्ध संघर्ष जारी रहेगा- आरक्षण विरोधी राष्ट्रभक्त
वही संदर्भ में कट्टर आरक्षण विरोधी राष्ट्रभक्त अनिल मिश्र, सुरेंद्र मालखेड़ी, सर्वेश पांडेय, प्रद्युमन शर्मा,रवि अवस्थी, अरुणेश मिश्र,जैनेंद्र तिवारी, चंदन सनातनी सहित राष्ट्र के कोने-कोने से आए राष्ट्र भक्तो ने कहा,की भारत सरकार जिसे आंदोलनकारी का नेतृत्वकर्ता घोषित कर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहा है, उसे हम लोग जानते ही नहीं, काले कानून के विरुद्ध बरसों बरसों से आंदोलन जारी है। जिसे आंदोलनकारीयों का नेतृत्वकर्ता घोषित किया जा रहा है, उसका जन्म भी नहीं हुआ था।राष्ट्र की एकता अखंडता के साथ ही राष्ट्र की प्रगति के लिए काले कानूनों का विरोध जारी है और समापन तक जारी रहेगा।


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