कृषि विज्ञान केंद्र, शिवहर में फलदार पौधों की खेती पर महिला किसान संगोष्ठी एवं खेत बचाओ अभियान का आयोजन

शिवहर जिला संवाददाता ओम प्रकाश पाठक

जिला शिवहर --150 से अधिक महिला किसानों ने लिया भाग, आम की वैज्ञानिक खेती एवं मिलीबग प्रबंधन की दी गई विस्तृत जानकारी. कृषि विज्ञान केंद्र शिवहर द्वारा आज दिनांक 27 अक्टूबर 2026 को वैज्ञानिक विधि से फलदार पौधों की खेती विषय पर एक दिवसीय महिला किसान संगोष्ठी का आयोजन किया गया। 

कार्यक्रम में 150 से अधिक महिला किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य महिला किसानों को फलदार पौधों की वैज्ञानिक खेती, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, आम के बागों की समुचित देखभाल तथा प्रमुख कीटों के प्रभावी प्रबंधन के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम के दौरान महिला किसानों को प्रायोगिक प्रदर्शन के अंतर्गत आम के पौधे भी वितरित किए गए, ताकि वे वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर अपने खेतों एवं घरों के आसपास फलदार पौधों का रोपण कर सकें और परिवार की पोषण सुरक्षा के साथ-साथ अतिरिक्त आय के स्रोत विकसित कर सकें।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अनुराधा रंजन कुमारी ने फलदार पौधों की बेहतर वृद्धि, नियमित फलन तथा गुणवत्तायुक्त उत्पादन के लिए संतुलित उर्वरक प्रबंधन के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पौधों को उनकी आयु, प्रजाति, वृद्धि की अवस्था तथा मिट्टी की उर्वरता के अनुसार आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है।

 नाइट्रोजन, फॉस्फोरस एवं पोटाश के साथ-साथ सूक्ष्म पोषक तत्वों की उचित उपलब्धता पौधों की स्वस्थ वृद्धि, जड़ विकास, पुष्पन, फल लगने तथा फलों की गुणवत्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने महिला किसानों को सलाह दी कि उर्वरकों का प्रयोग मृदा परीक्षण एवं वैज्ञानिक अनुशंसाओं के आधार पर करें तथा जैविक खाद, गोबर की अच्छी तरह सड़ी खाद और अन्य उपयुक्त जैविक स्रोतों का समुचित उपयोग करें। इससे मृदा स्वास्थ्य में सुधार, पोषक तत्वों की उपलब्धता तथा बागों की दीर्घकालिक उत्पादकता बनाए रखने में सहायता मिलती है।

इस अवसर पर विषय वस्तु विशेषज्ञ (उद्यानिक) डॉ. संचिता घोष ने आम की वैज्ञानिक खेती एवं उसके प्रमुख कीट मिलीबग के समेकित प्रबंधन पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आम उत्तर बिहार की महत्वपूर्ण फल फसलों में से एक है तथा इसकी वैज्ञानिक खेती अपनाकर महिला किसान अपनी आय में वृद्धि कर सकती हैं। उन्होंने आम के बाग की स्थापना के लिए स्वस्थ एवं प्रमाणित पौधों का चयन, उपयुक्त स्थान का चुनाव, निर्धारित दूरी पर रोपण, पौधों की प्रारंभिक अवस्था में नियमित सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण, संतुलित पोषण तथा पौधों की उचित देखभाल को आवश्यक बताया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्वस्थ पौधों का चयन और रोपण के बाद शुरुआती वर्षों में उचित प्रबंधन भविष्य में अच्छे फल उत्पादन की आधारशिला है।

संगोष्ठी में महिला किसानों को यह भी बताया गया कि फलदार पौधों की खेती केवल घरेलू उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाकर इसे लाभकारी उद्यम के रूप में विकसित किया जा सकता है। आम, अमरूद, नींबू एवं अन्य स्थानीय रूप से उपयुक्त फलदार पौधों का रोपण परिवार की पोषण आवश्यकताओं को पूरा करने, बाजार पर निर्भरता कम करने तथा अतिरिक्त आय प्राप्त करने में सहायक हो सकता है। फलदार पौधों के साथ उपलब्ध भूमि एवं संसाधनों के अनुसार सब्जियों और अन्य उपयुक्त फसलों को शामिल करके भूमि का बेहतर उपयोग भी किया जा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान महिला किसानों को आम के पौधों का प्रदर्शन कराते हुए उनके रोपण, प्रारंभिक देखभाल तथा पौधों की सुरक्षा से संबंधित व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई। पौधों के माध्यम से वैज्ञानिक तकनीकों को खेतों तक पहुंचाने और महिला किसानों को फल उत्पादन से जोड़ने की इस पहल का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर फलदार पौधों के रोपण को बढ़ावा देना तथा पोषण सुरक्षा एवं आजीविका संवर्धन में महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करना था।

कार्यक्रम का समापन महिला किसानों को वैज्ञानिक बागवानी तकनीकों को अपनाने तथा अपने परिवार एवं समुदाय में फलदार पौधों के रोपण को प्रोत्साहित करने के संदेश के साथ हुआ।

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