बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया होली का पर्व 346 जगहों पर किया गया होलिका दहन

भिवंडी ।। रंगो का पवित्र पर्व होली भिवंडी में रंगो के बजाय अबीर-गुलाल लगाकर पारंपरिक तरीके से शांतिपूर्ण ढंग से मनप गया. ताड़ाली स्थित स्वामी गंभीरानंद आश्रम में अबीर-गुलाल लगाने के बजाय विभिन्न प्रकार के खेलों एवं भजन कीर्तन का आयोजन करके होली का त्यौहार मनाया गया है. इस वर्ष भिवंडी शहर में कुुल 346 स्थानों पर होलिकादहन किया गया है जिसमें 102 सार्वजनिक एवं 246 निजी स्थानों पर होलिका दहन का आयोजन किया गया था.  इस अवसर पर पुलिस उपायुक्त राजकुमार शिंदे द्वारा शहर में एवं गणेशपुरी के उप अधीक्षक दिलीप गोडबोले द्वारा ग्रामीण  क्षेत्रों में पुलिस का कड़ा बंदोबस्त किया गया था.पुलिस उपायुक्त राजकुमार शिंदे ने होली के पहले ही शांतता समिति सहित शहर के नागरिकों की एक बैठक लेकर उन्हें शांतिपूर्ण ढंग से होली का त्यौहार मनाने की अपील की थी.                 

होली की पूर्व संध्या सहित होली के दिन भी स्थानीय पुलिस एवं यातायात पुलिस द्वारा भिवंडी के प्रवेश मार्गों सहित शहर के विभिन्न चौराहों पर शराब पीकर वाहन चलाने वालों की सघन जांच की गई. पुलिस नियंत्रण कक्ष द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार पूरे शहर में होली का त्यौहार शांतिपूर्ण ढंग से मनाया गया है.कहीं किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नही है.यातायात पुलिस द्वारा कल्याण बाईपास,आसबीबी नाका,वराला चौक,अंजुरफाटा,चाविंद्रा,नदी नाका सहित भिवंडी के प्रवेश मार्गों पर शराब पीकर वाहन चलाने वालों की जांच करके उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की गई है ।                                                    

फगन-री-धमाल का आयोजन : 

होली की पूर्व संध्या पर राजस्थान युवा मंच द्वारा आदर्श पार्क रोड स्थित व्हाईट हाउस हाल में फागन -री-धमाल कार्यक्रम का आयोजन किया गया था.जिसमें शहर के नागरिकों ने राजस्थानी सांस्कृतिक कार्यक्रम का जमकर लुत्फ़ उठाया.राजस्थानी संस्कृति को ज़िंदा रखने के लिये राजस्थान युवा मंच के संयोजक राजेश गोयनका सहित उनके सहयोगी महेश टाटिया,रामनिवास अग्रवाल,राजेंद्र पोद्दार,पंकज बाजारी,मनोज चौधरी,सुनील अग्रवाल,महेंद्र पंसारी,महेश बुकलसरिया,रवि मखरिया सहित उनके सहयोगियों द्वारा पिछले 12 वर्षों से राजस्थान के लोकगीतों एवं पारंपरिक नृत्यकला को जीवित रखने के लिये एक सार्थक प्रयास किया जा रहा है.इस वर्ष प्रेमजी बिंयाला एंड पार्टी के जेपी बिंयाला,सुशील पुरोहित,पवन शर्मा एवं सुभाष शर्मा सहित भिवंडी एवं ठाणे के कलाकारों द्वारा राजस्थानी गीत एवं नृत्य प्रस्तुत किया गया.                                           

ताड़ाली स्थित स्वामी गंभीरानंद आश्रम में बिना किसी प्रकार के रंग एवं अबीर -गुलाल के पिछले कई वर्षों से होलिकोत्सव का आयोजन किया जा रहा है.इसमें किसी प्रकार के रंगों एवं अबीर-गुलाल का प्रयोग न करके कैरमबोर्ड,क्रिकेट एवं बैडमिन्टन जैसे खेलों का आयोजन किया जाता है.इस अवसर पर ब्रह्मचारी प्रेमस्वरूप चैतन्य जी महाराज ने होली के त्यौहार पर प्रकाश डालते हुए  इसके बारे में जानकारी दी  ।भगवान वेदव्यास सिद्धपीठ में भजन-कीर्तन का भी आयोजन किया गया था, जिसमें डॉ.प्रभाकर विश्वकर्मा,दीपमाला विश्वकर्मा,सत्यम झा,राम अजय सिंह, एवं प्रेमचंद जायसवार सहित अन्य लोगों ने भजन प्रस्तुत किया। इसी प्रकार ब्रह्मचारी प्रेमस्वरूप चैतन्य जी महाराज की देखरेख में विभिन्न प्रकार के खेलों का आयोजन किया गया था.पूरे शहर में बड़े हर्षोल्लास के साथ  होली का त्यौहार मनाया गया.पानी की बचत करने के लिए शहर में लोगों ने एक दूसरे को रंगों के बजाय अबीर-गुलाल लगाकर होली की बधाई दी ।                                   

 कोली बंधुओं की है 85 वर्ष की होली की परंपरा :                                       

होली का त्यौहार एक ऐसा त्यौहार है जो बचपन से किशोरावस्था तक छोटे बच्चों के साथ मनाया जाता है. जिसके कारण होली के त्यौहार की परंपरा को बचाये रखने के लिये समाज के सभी लोग एक साथ आते हैं। भिवंडी शहर की जनसंख्या में बेतहाशा वृद्धि होने के बावजूद शहर के मध्य भाग भोईवाड़ा में कोली समाज द्वारा  पिछले 85 वर्षों से पारंपरिक होली मना जा रहा है।

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