
झूठी शिकायत कर डांइग कंपनियों को किया जाता है परेशान, डांइग कंपनियां बंद होने के कगार पर
- महेंद्र कुमार (गुडडू), ब्यूरो चीफ भिवंडी
- Oct 08, 2021
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भिवंडी।। ठाणे जिला के भिवंडी शहर कपड़ा उद्योग का सबसे बड़ा शहर है। यहां पर लाखों की संख्या में पावरलूम कारखाने स्थापित है। इन कारखानों में कच्चा कपड़ा तैयार किया जाता है। तैयार कच्चा कपड़ा को कलर करने के लिए शहर में दर्जनों की संख्या में छोटी-बड़ी ड्राइंग कंपनियां भी संचालित है। इन कंपनियो के कारण स्थानीय मजदूरों सहित प्रवासी मजदूरों को रोजगार उपलब्ध होता रहा है। किन्तु कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधो सहित दूर दराज के लोगों द्वारा कंपनियों पर विभिन्न प्रकार के आरोप लगाकर स्थानीय महानगर पालिका कार्यालय सहित प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड विभाग में झूठी शिकायत करते आ रहे है। जिसके कारण कंपनी के मालिकों को अनेक प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
यही नही कोव्हिड व मंदीकाल होने के कारण इन्हें आर्थिक नुकसान से गुजरना पड़ता है। कभी कभी कुछ दिनों के लिए कंपनियां भी बंद करनी पड़ती है। जिसके कारण हजारों की संख्या में मजदूर बेरोजगार हो जाते है। कंपनियां बंद होने के कारण मजदूरों को आर्थिक संकट उत्पन्न होता है। बतादें के प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड द्वारा जारी नियमों का पालन करते हुए शहर में चल रही ड्राइंग कंपनियों को उक्त विभाग एन.ओ.सी.भी जारी करता है।जिसका पालन करते हुए इन्हें कंपनी चलानी पड़ती है। यही नहीं प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड इन पर नियंत्रण करने के लिए नियंत्रण अधिकारी की नियुक्ति भी करता है। कंपनी चलाने के लिए सभी प्रकार के परवानगी होने के बावजूद भी शिकायत कार्यकर्ता द्वारा झूठी शिकायत करने के कारण शासकीय कार्यालयों का चक्कर काटना पड़ता है। शहर के अमीना कंपाउंड में स्थित मोदी ड्राइंग कंपनी सैकड़ों स्थानीय व प्रवासी मजदूरों को रोजगार उपलब्ध करवाती आ रही है। कंपनी के प्रबंधक ने बताया कि यह कंपनी लगभग 50 वर्षों से यही पर संचालित है। तब इस क्षेत्र में रहिवासी बस्तियां नहीं थी। पूरा क्षेत्र विरान पड़ा हुआ था।
कंपनी स्थापित होने के बाद क्षेत्र का विकास हुआ तथा लोग यहाँ पर रहने के लिए मकान बनाना शुरू किया और धीरे धीरे आस- पास अनेक इमारतें बनकर तैयार हो गयी। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि बस्तियां नहीं होने के कारण पहले बॉयलर में कोयले का इस्तेमाल किया जाता था। जिसके कारण थोड़ा प्रदूषण फैलता था।किन्तु अब इमारतें व बस्तियां होने के कारण वेजिटेबल बैकेट का इस्तेमाल किया जाता है। इससे जीरो प्रदूषण होता है। यही नहीं प्रदूषण विभागीय अधिकारियों ने इसे जलाने के लिए अनुमति भी दी है। कंपनियों की चिमनियां ऊँची होने के कारण इसका धुंआ भी ऊपर निकल जाता है। इसके साथ कंपनी से निकलने वाले पानी को ईटीपी प्लांट में शुद्धीकरण करके वही पानी को फिर से इस्तेमाल किया जाता है। जिसके कारण पानी की भी बचत हो जाती है। इसके बावजूद कुछ अपराधी किस्म के लोगों द्वारा जानबूझकर शासकीय कार्यालयों में झूठी शिकायत कर परेशान किया जाता है। ऐसे झूठी शिकायतकर्ताओं के खिलाफ कंपनियों का एक शिष्टमंडल जिला अधिकारी से मुलाकात कर इन पर कार्रवाई करने के लिए मांग किया जायेगा। जिसके कारण शिकायतकर्ता में हड़कंप मचा हुआ है।
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