भिवंडी में कचरा संकट: नागरिकों के कठोर कदम से फैला जहरीला धुंध

प्रशासन की लापरवाही से शहर पर मंडरा रहा है गंभीर स्वास्थ्य संकट

भिवंडी। भिवंडी शहर महानगर पालिका क्षेत्र में फैला कचरा अब सिर्फ एक प्रशासनिक समस्या नहीं रह गया है,बल्कि शहर के लाखों नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन पर मंडराते खतरे का प्रतीक बन गया है। सड़कों के किनारे जमा सैकड़ों टन कचरा अब धीरे-धीरे एक विनाशकारी समस्या का रूप ले चुका है। ठेकेदारों की लापरवाही और नगर पालिका के स्वास्थ्य विभाग की घोर उदासीनता ने शहर को एक जहरीले धुंध में धकेल दिया है। जिससे पूरे भिवंडी शहर का पर्यावरण दूषित हो रहा है। शहर में 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चल रहे स्वच्छता अभियान के बावजूद, प्रमुख सड़कों के किनारे बजबजाते कचरे के ढेर जस के तस पड़े है। इस स्थिति से हताश होकर नागरिकों ने अब कचरे के ढेरों में आग लगाना शुरू कर दिया है। आग से निकलने वाला जहरीला धुंआ न केवल वातावरण को प्रदूषित कर रहा है, बल्कि यह धुंध अब शहर की आबोहवा में ज़हर घोल रहा है। इससे सांस की बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है, और नागरिकों की जिंदगी खतरे में पड़ती जा रही है।

अंधाधुंध डंपिंग और जहरीला धुंध :

नागांव रोड के पास गैलेक्सी सिनेमा के सामने कचरे का एक विशाल डंपिंग ग्राउंड बन गया है‌ जहां पूरे क्षेत्र का कचरा फेंका जाता है। इस डंपिंग ग्राउंड से उठने वाली दुर्गंध और कचरे से निकलने वाले जहरीले तत्व पूरे इलाके को बीमारियों का केंद्र बना रहे हैं। राहगीर और स्थानीय निवासी इस दुर्गंध और धुंए से बचने के लिए नाक बंद कर चलने को मजबूर हैं लेकिन इससे बचना अब मुश्किल हो गया है। 

प्रभाग समिति स्तर पर कचरा उठाने की जिम्मेदारी निजी ठेकेदारों को सौंपी गई है, लेकिन इन ठेकेदारों की लापरवाही और भ्रष्टाचार से भिवंडी की जनता परेशान हो गई है। आरोप है कि नगर पालिका के कुछ भ्रष्ट अधिकारी ठेकेदारों को संरक्षण दे रहे हैं, जिससे वे कचरा उठाने की बजाय मिट्टी और कंकड़ उठाकर अपनी जेबें भर रहे हैं।नतीजतन, शहर के हर कोने में कचरा जमा हो रहा है और हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अब शहर जहरीले धुंध की चपेट में आ गया है।

स्वास्थ्य संकट की आहट :

भिवंडी में फैलता जहरीला धुंआ अब सांस की बीमारियों,फेफड़ों के संक्रमण और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि इस धुंध में उपस्थित हानिकारक गैसें और कण विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों के लिए बेहद घातक हैं। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो भिवंडी जल्द ही एक बड़े स्वास्थ्य आपातकाल का सामना कर सकता है।

प्रशासन की निष्क्रियता और जनता का गुस्सा :

नागरिकों की लगातार शिकायतों के बावजूद, नगर पालिका के स्वास्थ्य और स्वच्छता अधिकारी मौन बने हुए हैं। भ्रष्टाचार और प्रशासन की लापरवाही के चलते, भिवंडी के लोग अब खुद अपनी जान के लिए खतरा बन चुके इस कचरे के ढेर में आग लगाने को मजबूर हो रहे हैं। लेकिन इसका नतीजा शहर के हर नागरिक को भुगतना पड़ रहा है।भिवंडी अब एक विकराल संकट की ओर बढ़ रहा है और यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह संकट नियंत्रण से बाहर हो सकता है। नगर पालिका और प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी होगी, अन्यथा शहर के नागरिकों को इस जहरीले वातावरण में अपनी जिंदगी दांव पर लगाकर जीने को मजबूर होना पड़ेगा।

रिपोर्टर

संबंधित पोस्ट