
भिवंडी का चुनावी रोमांच: भाजपा-शिवसेना शिंदे गुट की हैट्रिक, सपा का जलवा बरकरार
- महेंद्र कुमार (गुडडू), ब्यूरो चीफ भिवंडी
- Nov 23, 2024
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भिवंडी। भिवंडी विधानसभा चुनाव में इस बार राजनीति की नई पटकथा लिखी गई। तीनों विधानसभा सीटों पर दिलचस्प मुकाबले देखने को मिले, जहां भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) ने हैट्रिक जीत का रिकॉर्ड बनाया, वहीं समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपनी लोकप्रियता साबित करते हुए दूसरी बार ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
भिवंडी पश्चिम सीट पर भाजपा की लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की है। इस सीट पर भाजपा के महेश चौघुले ने विरोधियों को पछाड़ते हुए अपनी विजय यात्रा को जारी रखा। उन्होंने सपा के रियाज़ आज़मी को 31,293 वोटों से हराया। महेश प्रभाकर चौघुले को 70,172 वोट मिले जबकि रियाज़ आज़मी को 38,879 वोट मिले है।अन्य उम्मीदवारों में निर्दलीय विलास पाटिल 31,579 वोट और कांग्रेस के दयानंद चोरघे को 21,980 वोट, AIMIM के वारिस पठान को 15800 वोट मिले,जो इस सीट पर मुख्य दावेदार थे। इस सीट पर कुल 14 लोग चुनावी रण में थे।
भिवंडी पूर्व विधानसभा सीट पर सपा का परचम लहराया है। इस सीट पर सपा के रईस कासम शेख ने अपने प्रदर्शन से एक बार फिर जनता का विश्वास जीता। उन्होंने शिवसेना शिंदे गुट के संतोष शेट्टी को 51,784 वोटों के बड़े अंतर से हराया। रईस शेख को इस बार 1,19,454 वोट मिले जबकि शिवसेना शिंदे गट के संतोष शेट्टी को 67,670 वोट मिले हैं। इसके आलावा मनसे के मनोज गुलवी 1,003 वोट और अन्य उम्मीदवार यहां कोई खास प्रभाव नहीं डाल सके। इस सीट पर भी कुल 11 लोग चुनावी मैदान में थे।
भिवंडी ग्रामीण सीट शिवसेना शिंदे गुट का दबदबा बरकरार रहा है। इस सीट पर शिवसेना शिंदे गुट के शांताराम मोरे ने जीत की हैट्रिक लगाते हुए शिवसेना उद्धव गट के महादेव घाटाल को 57,962 वोटों के बड़े अंतर से पराजित किया। शांताराम मोरे को 1,27,205 वोट जबकि महादेव घटाल को 69,243 वोट मिले। वही पर निर्दलीय मनीषा ठाकरे 24,304 और मनसे की वनिता कथोरे को 13,816 वोट मिले।
भिवंडी के मतदाताओं ने जहां प्रमुख दलों का समर्थन किया, वहीं नोटा (NOTA) का भी खासा असर दिखा। भिवंडी पश्चिम में 1,066 वोट, भिवंडी पूर्व 738 वोट और भिवंडी ग्रामीण 2,571 वोट नोटा को मिले है। इस चुनाव ने भिवंडी में भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) की मजबूत पकड़ को दर्शाया, जबकि सपा ने यह साबित किया कि भिवंडी पूर्व में उनकी स्थिति अडिग है। इन परिणामों से यह साफ हो गया है कि भिवंडी में राजनीति की तस्वीर बदल रही है और आने वाले चुनावों में बड़े उलटफेर हो सकते है।
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