
भिवंडी में नियम कानून को ताक पर रखकर चल रही है स्कूल बसे,कार्रवाई हेतु आरटीओ विभाग उदासीन
- महेंद्र कुमार (गुडडू), ब्यूरो चीफ भिवंडी
- Nov 29, 2024
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▪️अप्रशिक्षित व बिना लायसेंस वाले चालकों से चलवाते है बसे,कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
▪️तेज रफ्तार बस की चपेट में आने से 63 वर्षीय महिला की हुई मौत,स्कूल व्यवस्था पर उठे सवाल
भिवंडी। भिवंडी में चलने वाले तमाम स्कूलों द्वारा नियम कानून को ताक पर रखकर इन दिनों स्कूली बस चलाया जा रहा है।तमाम स्कूल वाले अप्रशिक्षित चालकों द्वारा खटारा बसे चलवाई जा रही है।दो दिन पहले बिना लायसेंस के बस चालक द्वारा मनमानी तरीके से बस चलने के कारण हुए दुर्घटना में एक वृद्ध महिला की मौत हो गई थी।जबकि इसके कारण शहर में कभी भी बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।लेकिन ठाणे आरटीओ अथवा यातायात विभाग की पुलिस स्कूली बसों पर कार्रवाई को लेकर उदासीन बनी हुई है।इस कारण अभिभावकों के साथ जनता में रोष व्याप्त है।
भिवंडी शहर व आस पास के इलाकों में कई दर्जन इंग्लिश सहित विभिन्न भाषाओं का स्कूल संचालित है।कई बड़े तामझाम वाले स्कूल अपने स्कूली छात्रों को स्कूल में लाने व घर पर पहुंचने के लिए ठेका पद्धति से बस चलवाते है।सूत्र बताते है कई स्कूल की बसे खटारा है,जिसमे मामूली बारिश में भी पानी टपकता है।स्कूल संचालकों की अनदेखी के कारण अधिकांश ठेकेदार बसे पर बिना लायसेंस व अप्रशिक्षित चालकों से बसे चलवाते है।जिसके कारण जहां मासूम बच्चों का जीवन खतरे में पड़ा रहता है वहीं पर दुर्घटना की स्थिति बनी रहती है।इतना ही सूत्र बताते है कि कई ट्रांसपोर्टर तो आरटीओ से बिना फिटनेस शार्टिफिकेट लिए बिना बसों की पासिंग किए बसे चलवा रहे है।यहां बस चलवाने वाले ट्रांसपोर्टर हाईकोर्ट के द्वारा दिए गए गाइडलाइन का पालन नहीं करते है।उनकी बसों में न जॉली लगी रहती है न ही महिला कन्डेक्टर रखे है।बसों में सीसीटीवी भी नहीं लगाकर रखते है।बस चालक व उसके कंडक्टर छात्रों के साथ दुर्व्यवहार करते है।सबसे अहम बात यह है कि कई ट्रांसपोर्टर स्कूलों की छुट्टी होने के बाद स्कूली बसों को मजदूरों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने के लिए लगा रखा है।वही कई बस वालों ने तो बस का कलर भी पीला नहीं रखा है।लेकिन हैरत की बात यह है कि अवैध तरीके से चलने वाले बसों पर कार्रवाई को लेकर यातायात पुलिस अथवा आरटीओ कार्रवाई करने को लेकर पूरी तरह उदासीन बना हुआ है।जो अभिभावकों में आक्रोश का कारण बना हुआ है।हालांकि इस संदर्भ में कई बार ठाणे उपप्रदेशिक अधिकारी से संपर्क करने की कोशिश की गई।लेकिन उनका मोबाइल स्विच ऑफ होने के कारण उनका प्रतिक्रिया नहीं मिल सका।
स्कूल बस द्वारा रौंदने से बुजुर्ग महिला की मौत,ड्राइवर के पास नहीं था वाहन चलने का लायसेंस
भिवंडी के ग्रामीण इलाके में स्थित न्यू ईरा स्कूल की एम एच 43 एच 1610 क्रमांक की स्कूल बस सोमवार की दोपहर स्कूली बच्चों को स्कूल से छुटने के बाद घर छोड़ने जा रही थी।तेज रफ्तार की उक्त बस जैसे ही गैबीनगर इलाके में पहुंची,उसी दरम्यान तीन महिलाएं सड़क क्रास कर रही थी।जिसमे से दो महिला तो बच गई लेकिन गुलजार नगर निवासी जुबेदा गुलशन(63) को उक्त बस ने रौंद दिया।जिसके कारण उसकी मौत हो गई।मृतक महिला के बेटे की शिकायत पर शांतिनगर पुलिस ने बस चालक इरफान हैदर पर केस दर्जकर उसे गिरफ्तार कर लिया है।पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार बस ड्राइवर के पास वाहन चलने का लायसेंस भी नहीं था।बावजूद इसके स्कूल संचालकों ने बस में सवार मासूम बच्चों को उनके गंतव्य तक पहुंचने का जिम्मा देकर मासूम बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ किया ।
जानवरों की तरह प्रायवेट वाहनों में ठुसे जाते है बच्चे
इसके अलावा शहर में स्कूली छात्रों को स्कूल से लाने के जाने का काम निजी वाहनों के अलावा रिक्शों द्वारा किया जा रहा है।जो एक एक गाड़ियों में छमता से तीन गुना ज्यादा बच्चों को जानवरों की तरह ठूंस कर लेकर जाते आते है।जिसकी कारण कभी भी बड़ी दुर्घटना घट सकती है।बावजूद प्रशासन इन वाहनों पर कार्रवाई को लेकर अनदेखी किया जा रहा है।
इधर भिवंडी शहर यातायात विभाग के सीनियर पीआई सुधाकर खोत ने बताया कि शांतिनगर रोड पर स्कूल बस द्वारा हुए दुर्घटना को लेकर स्कूल बस की जांच की कार्रवाई शुरू की है।उन्होंने बताया कि शहर के सभी स्कूलों को उन्होंने पत्र जारी कर सरकारी गाइडलाइन के अनुसार बसों को चलने की सलाह दिया गया है।उनका कहना है कि इसके बावजूद जो भी स्कूली बसे नियम कानून को ताक पर रखकर चलाएंगे उन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
स्कूल बसों के लिए आरटीओ विभाग की गाइडलाइन से जुड़ी कुछ बातें
▪️स्कूल बसों में जीपीएस और सीसीटीवी अनिवार्य है,साथ ही स्कूल बसों का रंग पीला होने के साथ महिला कंडक्टर होनी चाहिए।
▪️स्कूल बसों में अग्निशमन उपकरण, प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स, और सीटों के नीचे स्कूल बैग रखने की जगह होनी चाहिए।
▪️स्कूल बस चालक को बच्चों की पूरी सूची रखने के अलावा स्कूल बसों की खिड़कियों पर लोहे की रोड व जाली अनिवार्य होनी चाहिए।
▪️स्कूल परिसर में भी सीसीटीवी लगाना ज़रूरी है।सीसीटीवी की फ़ुटेज 60 दिनों तक रखनी होती है और किसी भी जांच के लिए पुलिस को सौंपी जानी चाहिए।
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