
आजाद भारत में ब्राह्मण झेल रहा जातीय जन्म का दंश- दुर्गेश किशोर
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, ब्यूरो चीफ कैमूर
- Mar 20, 2025
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संवाददाता श्याम सुंदर पाण्डेय की रिपोर्ट
दुर्गावती(कैमूर)-- जब हम ब्राह्मण जाति का नाम सुनते हैं, तो हमारे मन में प्राचीन काल की एक छवि उभरती है ।एक ऐसा समाज, जिसमें ब्राह्मण ज्ञान और धर्म का ध्वजवाहक था, समाज के शीर्ष पर विद्वान और वेदों के ज्ञाता के रूप में प्रतिष्ठित था। लेकिन आज, यह छवि वास्तविकता से कोसों दूर है। आधुनिक समय में ब्राह्मण जाति के अधिकांश लोग, खासकर गरीब वर्ग, आर्थिक तंगी और सरकारी अनदेखी के कारण गंभीर कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।प्राचीन कहानियों में अक्सर ऐसे ब्राह्मणों का उल्लेख मिलता है जो अपने ज्ञान और धार्मिक कर्मकांडों से परिवार का पालन-पोषण करते थे, लेकिन आज का ब्राह्मण समाज, विशेष रूप से गरीब ब्राह्मण, आर्थिक तंगी और सामाजिक उपेक्षा के शिकार हैं। यह विडंबना है कि ब्राह्मण जाति को 'विशेषाधिकार प्राप्त' मानने की धारणा के कारण उन्हें सरकारी योजनाओं और सुविधाओं से वंचित कर दिया गया है, जबकि उनकी वास्तविक स्थिति किसी पिछड़े वर्ग से कम नहीं है। यह विभाजन उस समय गहरा हुआ जब ब्रिटिश शासन के 'फूट डालो और राज करो' की नीति ने समाज को बांट दिया। स्वतंत्र भारत में, विभिन्न सरकारों ने पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए आरक्षण व्यवस्था लागू की, जो अपने समय की आवश्यकता थी। हालांकि, इस प्रक्रिया में ब्राह्मण समाज के गरीब वर्ग की अनदेखी हो गई। उन्हें अगड़े वर्ग में गिना जाता रहा, जबकि उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति कई पिछड़े वर्गों से भी बदतर होती गई।
आज के दौर में, देश के अनेक ब्राह्मण परिवार गरीबी रेखा से नीचे जीवन बिता रहे हैं। उन्हें न तो सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है, न ही आरक्षण की सुविधा। सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश पाने के लिए, ये परिवार बार-बार असफल हो जाते हैं, क्योंकि उनके पास आर्थिक मदद नहीं होती और न ही कोई जातिगत आरक्षण। ब्राह्मण जाति के गरीब वर्ग को न उच्च शिक्षा के अवसर मिलते हैं और न ही रोजगार की गारंटी।आरक्षण प्रणाली का वर्तमान स्वरूप अब अपने उद्देश्य से भटक गया है। समय की मांग है कि सरकार आरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं को केवल जाति के आधार पर नहीं, बल्कि आर्थिक स्थिति के आधार पर लागू करे। गरीब ब्राह्मणों को भी सरकारी सहायता की उतनी ही जरूरत है जितनी किसी अन्य वर्ग के गरीब लोगों को होती है।
हाल ही में, सरकार ने सामान्य वर्ग के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्लूएस) आरक्षण लागू किया है, जो एक सकारात्मक कदम है। लेकिन इसके बावजूद, गरीब ब्राह्मण परिवार कई योजनाओं और लाभों से वंचित रह जाते हैं। अन्य सरकारी योजनाओं में भी इस वर्ग के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं है, जिससे उनकी स्थिति और भी जटिल हो जात है।अब समय आ गया है कि समाज और सरकार इस सच्चाई को समझें कि ब्राह्मण समाज में भी गरीब वर्ग मौजूद है, जो सरकारी मदद का हकदार है। हमें आर्थिक आधार पर योजनाओं और सुविधाओं का पुनर्गठन करना होगा ताकि जरूरतमंदों तक सही मदद पहुंच सके, चाहे वे किसी भी जाति से हों।ब्राह्मण समाज के गरीब वर्ग की अनदेखी को अब और अनदेखा नहीं किया जा सकता। यदि हम एक समान और न्यायसंगत समाज की स्थापना चाहते हैं, तो हमें उन सभी वर्गों को उचित अवसर और सहायता प्रदान करनी होगी, जिनकी आवश्यकता है।
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