भिवंडी में ओबीसी महासंघ सख्त, सरकार को सौंपा मांग पत्र – आंदोलन की चेतावनी

भिवंडी । ओबीसी समाज के अधिकारों और लंबित मुद्दों को लेकर राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ ने महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। गुरुवार को महासंघ की भिवंडी इकाई ने एक विस्तृत मांग पत्र भिवंडी प्रांत अधिकारी को सौंपते हुए साफ चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं की गईं तो राज्यव्यापी आंदोलन खड़ा किया जाएगा। मांग पत्र में कहा गया है कि मराठा आरक्षण के नाम पर ओबीसी समाज के हिस्से का आरक्षण किसी भी सूरत में कम नहीं किया जाना चाहिए। महासंघ ने तर्क दिया कि ओबीसी समाज पहले ही सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा है, ऐसे में उनके आरक्षण अधिकार से किसी प्रकार की छेड़छाड़ स्वीकार नहीं होगी। महासंघ ने कई अन्य मुद्दों को भी उठाया। इनमें ओबीसी विद्यार्थियों के लिए विशेष छात्रवृत्ति योजना, गरीब परिवारों को 100 यूनिट तक बिजली बिल माफ करने, बारिश से हुए कृषि नुकसान की भरपाई, आर्थिक रूप से कमजोर ओबीसी विद्यार्थियों के लिए छात्रावास निर्माण और युवाओं को स्वरोजगार के लिए 1,000 करोड़ रुपये का विशेष कोष बनाने जैसी मांगें शामिल हैं।

संगठन ने शैक्षणिक संस्थानों में ओबीसी आरक्षण का कड़ाई से पालन कराने, ओबीसी छात्राओं को मुफ्त शिक्षा, मेडिकल व इंजीनियरिंग में ओबीसी विद्यार्थियों के लिए अलग सीटें आरक्षित करने पर भी जोर दिया है। इसके अलावा म्हाडा और सिडको की आवासीय योजनाओं में आरक्षण, शहर और तालुका स्तर पर पुस्तकालय निर्माण, डॉ. पंजाबराव देशमुख के नाम पर ओबीसी समाजसेवक पुरस्कार और एससी-एसटी की तर्ज पर ओबीसी समाज के लिए राज्यस्तरीय योजना शुरू करने की मांग भी की गई है.भिवंडी प्रांत कार्यालय के बाहर हुए एक दिवसीय धरने में महासंघ के नेता भगवान ठाकुर के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ओबीसी समाज के कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। पूर्व विधायक रूपेश दादा म्हात्रे समेत कई प्रमुख चेहरे धरने में मौजूद रहे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की और अंत में हस्ताक्षरित ज्ञापन प्रांत अधिकारी को सौंपा।  इस अवसर पर मुख्य रूप से विश्वास थले, डाॅ. सोन्या काशीनाथ पाटिल, मनोज गंगे,यशवंत सोरे, रमेश देवेकर, विशू भाऊ म्हात्रे, सुनील बाबू पाटिल, शोभा सुधाकर म्हात्रे, नांदिनी जनार्दन चौधरी, संदिप मनोहर पाटिल, मनोहर तरे आदि बड़ी संख्या में ओबीसी समाज के पदाधिकारी व स्थानीय लोग  ओबीसी समाज के लोग शामिल हुए और  अपनी मांगों को‌ लेकर नारे लगाए। महासंघ के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि पिछले पांच वर्षों में भिवंडी सहित राज्य के कई हिस्सों में ओबीसी समुदाय की लगातार अनदेखी हुई है। सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित रही, जबकि योजनाओं का वास्तविक लाभ समाज तक नहीं पहुंचा.नेताओं ने साफ कर दिया कि 30 अगस्त 2025 से नागपुर में महासंघ का "साखली उपोषण" शुरू हो चुका है। यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया, तो राज्यभर में उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।

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