पार्टी के बाद जनता का फूटा गुस्सा, रईस शेख के खिलाफ लगे ‘मुर्दाबाद’ के नारे

भिवंडी। समाजवादी पार्टी (सपा) के भिवंडी पूर्व विधानसभा क्षेत्र के विधायक रईस शेख इन दिनों तीव्र विरोध के घेरे में हैं। हाल ही में आयोजित “30 साल बेमिसाल” कार्यक्रम के बाद जहां पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आए, वहीं अब आम जनता का गुस्सा भी सड़कों पर दिखाई देने लगा है। भिवंडी फर्स्ट के माध्यम से शहर की लगभग 22 सामाजिक संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में सपा प्रदेश अध्यक्ष अबू आसिम आजमी ने शिरकत की थी। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने विधायक रईस शेख पर तीखे हमले किए। आजमी ने कहा, “ रईस शेख पार्टी से अलग होकर अपनी दुकान चला रहे हैं और संगठन की गतिविधियों से दूरी बनाए हुए हैं।” उन्होंने आगे कहा, “मैं गली-मोहल्लों से लोगों को उठाकर समाज की सेवा के लिए लाता हूं, उन्हें नेता, नगरसेवक और विधायक बनाता हूं, लेकिन वही लोग मुझसे दगा कर जाते हैं।” इस बयान के बाद शहर में सपा के भीतर दरार की चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय स्तर पर यह कहा जा रहा है कि पार्टी की ‘साइकिल’ अब दो भागों में बंटती नज़र आ रही है।

इसी बीच विधायक रईस शेख ने एक और विवाद को जन्म दे दिया। उन्होंने राज्य सरकार को पत्र लिखकर स्कूलों में प्रार्थना के समय “वंदे मातरम्” गीत गाने के आदेश को रद्द करने की मांग की, यह कहते हुए कि इससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंच रही है। विधायक के इस बयान के बाद शहर के हिन्दू समाज में गहरा आक्रोश फैल गया। पोगांव क्षेत्र के मुख्य द्वार पर बड़ी संख्या में नागरिकों और भाजपा पदाधिकारियों ने एकत्र होकर रईस शेख के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। भाजपा भिवंडी शहर अध्यक्ष रवि सावंत ने कहा, “नगरपालिका चुनाव करीब हैं और विधायक वोट बैंक की राजनीति के तहत माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।”स्थानीय निवासियों ने कहा कि भिवंडी के सभी स्कूलों में वर्षों से “वंदे मातरम्” गीत गाया जा रहा है और इससे कभी किसी को आपत्ति नहीं हुई। नागरिकों का आरोप है कि विधायक शेख जानबूझकर सांप्रदायिक माहौल को भड़काने का प्रयास कर रहे हैं। भिवंडी में बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच अब यह मामला सपा के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। पार्टी के भीतर मचे घमासान और जनता के उबाल के बीच विधायक रईस शेख पर हर तरफ से दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।

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