सरकार द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्य में बिल बनाने वाले बिलिंग अफसर पर नकेल कसने की है जरूरत


दुर्गावती(कैमूर)-- वरिष्ठ संवाददाता श्याम सुंदर पाण्डेय की लेखनी से-

केंद्र या बिहार सरकार के द्वारा कराए जा रहे जनहित में सरकारी योजनाओं के तहत बनने वाले भवन, पथ,जल मीनार का निर्माण उसमें बिलिंग अफसर जो बिल बनाता है उसकी जिम्मेदारी सीधे रूप से तय होनी चाहिए। सरकार के द्वारा योजनों का चयन करने के बाद लागत के अनुरूप एक इंजीनियर मेटल जोड़कर और मजदूरी जोड़ कर योजना का रूप रेखा तैयार कर कार्यक्रम के राशि का प्राक्कलन बनता है। लेकिन मानक के अनुरूप लागत के हिसाब से काम नहीं हो पाते हैं, जिसके कारण धरातल पर योजनाएं कुछ ही दिनों में खराब हो जाती हैं। इस संबंध में सरकार ठेकेदार या पंचायत में पंचायत सचिव पर कार्रवाई कर अपना पीछा छुड़ा लेती है। अगर सचमुच बिल बनाने वाले पदाधिकारी मानक के अनुरूप काम नहीं हुआ है, तो शत प्रतिशत बिल कैसे बना देते हैं और ठेकेदार पैसा निकाल लेता है और वह योजना फिर नष्ट हो जाती है। आज के समय में अक्सर देखा जाए तो ग्रामीण इलाकों की ज्यादा सड़के या बिल्डिंग के कामों में मानक के अनुरूप काम नहीं होने से योजना धरातल पर कुछ ही दिन टिक पाती है और फिर नष्ट हो जाती हैं। योजनाओं के लूट में सभी निगरानी में लगे पदाधिकारी प्रतिनिधि इस भ्रष्टाचार के संलिप्तता से दूर नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि जिम्मेवारी सबकी बनती है इसलिए बराबर के दोषी सभी हैं। इंजीनियरों के द्वारा बनाई गई योजना के अनुसार समय सीमा के अंदर यदि योजनाओं में खराबी आती है तो संबंधित बिलिंग पदाधिकारी पर सीधे कार्रवाई होनी चाहिए क्योंकि काम अच्छा और बढ़िया हुआ है इसका सर्टिफिकेट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर ही देते हैं। जब तक सरकार संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदारी तय नहीं करती तब तक यह भ्रष्टाचार रुकने वाला नहीं है।

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