शराबबंदी दिख रही विफल, सफल बनाने के लिए सख्त कानून की है जरूरत

संवाददाता श्याम सुंदर पाण्डेय की रिपोर्ट 

दुर्गावती(कैमूर)-- शराब विक्रेता की डाल-डाल तो पात पात की कहानी इन दिनों कैमूर में ही नहीं बिहार में चरितार्थ  हो रही है। दुर्गावती प्रखंड का अधिकतर हिस्सा उत्तर प्रदेश की सीमा से लगता है, जिसके कारण शराब के विक्रेता और  शराब का व्यवसाय करने वाले आसानी से शराब को लेकर बिहार के अन्य हिस्सों में दाखिल हो जाते हैं। लेकिन कानून के सख्त नहीं होने के कारण उसे पुलिस पकड़ती भी है तो कुछ ही दिनों में शराब विक्रेता फिर जेल से वापस आकर अपने धंधे में लग जाते है। सरकार को चाहिए कि यदि सचमुच शराब पर पाबंदी लगाना है, और बंद करना है, तो पकड़े गए शराब व्यवसायी की जमानत कम से कम 5 वर्ष से पहले नहीं होना चाहिए। अन्यथा जेल में रहने के बाद ही  केश को खोल पर 5 बरस की सजा से कम नहीं होने का कानून बना देना चाहिए, तब जाकर शराब विक्रेता और व्यवसाईयों पर एक हद तक अंकुश लग सकता है। यही नहीं जो शराब का सेवन करते पकड़े जाएं तो उनकी जमानत 2 बरस से पहले नहीं होनी चाहिए यदि होती भी है तो जुर्माना वसूल कर जमानत देना चाहिए, जिससे राजस्व भी आ सके और दंड भी मिल सके। अन्यथा लचीले कानून से यह व्यवसाय इसी तरह से फलता-पुलता रहेगा और पुलिस तथा एक्साइज विभाग के लोग परेशान होते रहेंगे। शराब व्यवसाईयों को पकड़ना कोई आसान काम नहीं है, जब शराब व्यवसाय पर पाबंदी लगाने वाले कामों में लगे कर्मचारी जब बहुत मशक्कत के बाद पकड़ते हैं, और फिर वह जल्द छूट जाता है और व्यवसाय में फिर लग जाता है, तो उनके मनोबल गिर जाते हैं और शराब विक्रेता और व्यवसाईयों  के हौसले बुलंद हो जाते हैं, जिसके कारण शराब पर पूर्ण रूप से पाबंदी नहीं लग सकती। जब तक शराब बंदी पर सख्त कानून नहीं तब तक शराब व्यवसाय का खेल बंद हो नहीं सकता। हल्के कानून शराब व्यवसाईयों को भय मुक्त बनाने में और व्यवसाय करने में सहयोग प्रदान कर रहे हैं।इसलिए बिहार में शराब बंदी के लिए कठोर कानून पारित करने की जरूरत है तब जाकर कुछ हद तक प्रतिबंध लगा सकता है।

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