137 भिवंडी पूर्व विधानसभा सीट:
- महेंद्र कुमार (गुडडू), ब्यूरो चीफ भिवंडी
- Dec 29, 2025
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◾कांग्रेस की अंदरूनी कलह ने बदला सियासी संतुलन !
◾सपा बनी भावी नगरसेवकों और मतदाताओं की पहली पसंद
भिवंडी । 137 भिवंडी पूर्व विधानसभा क्षेत्र में आगामी भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल चरम पर है। कांग्रेस पार्टी के भीतर लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी और 18 नगरसेवकों की बगावत ने जहां पार्टी की नींव कमजोर कर दी है, वहीं समाजवादी पार्टी (सपा) ने इसी राजनीतिक अस्थिरता का लाभ उठाकर खुद को सबसे मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित कर लिया है। यह विधानसभा क्षेत्र मुस्लिम बहुल होने के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक और भौगोलिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। यहां की राजनीति हमेशा विकास, पहचान और बुनियादी सुविधाओं के इर्द-गिर्द घूमती रही है।
◾ 2019 से बदली भिवंडी पूर्व की सियासत:
कभी भिवंडी पूर्व विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी का नाम केवल औपचारिक उपस्थिति तक सीमित रह गया था। लेकिन वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव ने इस तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया। सपा उम्मीदवार रईस शेख ने शिवसेना के तत्कालीन विधायक रूपेश म्हात्रे को बेहद करीबी मुकाबले में पराजित कर सपा की खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस दिलाई।2019 के चुनाव में रईस शेख को 45,531 मत मिले, जबकि रूपेश म्हात्रे को 44,081 मतों पर संतोष करना पड़ा। महज 1,450 मतों के अंतर से मिली इस जीत ने भिवंडी पूर्व की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत कर दी।
◾ 2024: विकास के नाम पर निर्णायक जनादेश:
वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में रईस शेख ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान किए गए विकास कार्यों को जनता के सामने रखा। सड़क, जलापूर्ति, ड्रेनेज, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को चुनावी एजेंडा बनाया गया। इस बार मुकाबला भाजपा–शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रत्याशी संतोष शेट्टी से था। चुनाव परिणामों ने स्पष्ट कर दिया कि जनता ने विकास के नाम पर भरोसा जताया। रईस शेख को 1,19,687 मत मिले, जबकि संतोष शेट्टी को 67,672 मत प्राप्त हुए।
52,015 मतों की विशाल जीत ने सपा को इस क्षेत्र में निर्विवाद ताकत बना दिया।
◾सात साल का कार्यकाल और विकास की राजनीति:
पिछले सात वर्षों में विधायक रईस शेख ने क्षेत्र में कई बुनियादी विकास कार्य कराए। पहाड़ी इलाकों में जलापूर्ति सुधार, सड़क कांक्रीटीकरण, नालियों का निर्माण, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की सुविधाओं में इजाफा, डिजिटल स्कूल, श्मशान भूमि, कबिस्तान और झोपड़पट्टी पुनर्विकास जैसे मुद्दों पर काम हुआ। इन्हीं कार्यों का परिणाम है कि आज सपा कार्यालय में टिकट मांगने वाले भावी नगरसेवकों की लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं। कई पूर्व नगरसेवक और विभिन्न दलों से जुड़े नेता भी सपा की ओर रुख करते नजर आ रहे हैं।
◾2017 का मनपा चुनाव और कांग्रेस की चूक:
वर्ष 2017 के महानगरपालिका चुनाव में कांग्रेस पार्टी इस विधानसभा क्षेत्र में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। कुल साढ़े 12 प्रभागों में कांग्रेस ने 6 प्रभागों पर कब्जा जमाया था। समाजवादी पार्टी को केवल एक प्रभाग में 2 सीटें मिली थीं। एक प्रभाग आरपीआई (एकतावादी) के पैनल ने जीता था, जबकि शिवसेना और भाजपा ने मिलकर चार प्रभागों में जीत दर्ज की थी। लेकिन यह बढ़त ज्यादा समय तक टिक नहीं सकी। ढाई साल बाद हुए महापौर चुनाव में कांग्रेस के इस क्षेत्र से जीते 13 नगरसेवकों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर दी। इन बागी नगरसेवकों ने कोणार्क विकास आघाड़ी के उम्मीदवार को समर्थन देकर महापौर बना दिया। यहीं से कांग्रेस की साख और संगठन दोनों को गहरा झटका लगा।
◾मुस्लिम बहुल इलाकों में सपा की मजबूत पकड़:
भिवंडी पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के कुल 12 में से 8 प्रभाग मुस्लिम बहुल माने जाते हैं। यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से सेक्युलर राजनीति का गढ़ रहा है। वन विभाग की जमीन पर बसे झोपड़पट्टियों और अनधिकृत मकानों में रहने वाले मतदाता यहां चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।शांतिनगर, गायत्रीनगर, गैबीनगर, गुलजार नगर, मिल्लतनगर, नवी बस्ती जैसे इलाके मुस्लिम बाहुल्य हैं, जहां सपा को लगातार बढ़त मिलती रही है। वहीं कामतघर, ताडाली,टेमघर, भादवड़, शास्त्रीनगर,मानसरोवर,पद्ममानगर, कणेरी और पोगांव जैसे क्षेत्र हिंदू बहुल हैं। यहां आगरी, कोली, तेलगू और उत्तर भारतीय समाज की मौजूदगी के कारण भाजपा और शिवसेना का प्रभाव बना रहता है।
◾बुनियादी समस्याएं बनी सबसे बड़ा मुद्दा:
भिवंडी पूर्व विधानसभा क्षेत्र आज भी कई गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। अधिकांश इलाका पहाड़ी होने के कारण जलापूर्ति की समस्या स्थायी बनी हुई है। मोती कारखानों और डाइंग-साइजिंग उद्योगों के चलते प्रदूषण का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। मानसून के दौरान पहाड़ी खिसकने की घटनाओं का डर बना रहता है। कई इलाकों में सड़कें जर्जर हालत में हैं, साफ-सफाई व्यवस्था बेहद कमजोर है और सीवर लाइन की समस्या आम नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है।मुस्लिम बहुल इलाकों में गार्डेन व विवाह समारोहों के लिए पर्याप्त शादी हॉल नहीं हैं, जिसके चलते लोगों को दूसरे इलाकों में जाना पड़ता है। संकरी गलियां और अनियोजित बस्तियां आपातकालीन सेवाओं के लिए भी चुनौती बनी हुई हैं।
◾वर्ष 2017 के चुनाव के परिणाम :
*प्रभाग क्रंमांक - 2 - कांग्रेस
*प्रभाग क्रमांक - 3 - आरपीआई (A)
*प्रभाग क्रमांक -4 - कांग्रेस
* प्रभाग क्रमांक -9 - कांग्रेस
* प्रभाग क्रमांक - 10 - कांग्रेस
* प्रभाग क्रमांक - 11- सपा -2, कांग्रेस -2
* प्रभाग क्रमांक -12- कांग्रेस
* प्रभाग क्रमांक - 13- शिवसेना
* प्रभाग क्रमांक - 14 - कांग्रेस
* प्रभाग क्रमांक -15- शिवसेना
* प्रभाग क्रमांक -16- भाजपा
* प्रभाग क्रमांक - 17- भाजपा
◾ 2019 महापौर चुनाव में कांग्रेस के बागी नगरसेवक :
प्रभाग क्रमांक 2 अ,ब,क,ड - श्रीमति नमरा औरंगजेब अंसारी, श्रीमति मिसबाह इमरान खान, इमरान वली मोहम्मद खान और अहमद हुसैन सिद्दीकी।
प्रभाग क्रमांक -4 अ,ब,क
अरशद मोहम्मद असलम अंसारी, श्रीमति शबनम महबूब रहेमान अंसारी, श्रीमति अंजुम अहमद हुसैन सिद्दीकी।
प्रभाग क्रमांक -9 क,ड
श्रीमति राबिया मोहम्मद शमीम अंसारी, तफज्जुल हुसैन मकसूद हुसैन अंसारी।
प्रभाग क्रमांक-10 ब
श्रीमति शीफा अशफाक अंसारी।
प्रभाग क्रमांक -11 ड.
नसरूल्ला नूर मोहम्मद अंसारी।
प्रभाग क्रमांक 14 ब, ड.
श्रीमति हुस्ना परवीन मोहम्मद याकूब अंसारी, मतलूब अफजल खान।
कांग्रेस पार्टी के बागी नगरसेवकों को महाराष्ट्र शासन के नगर विकास विभाग ने विभागीय आयुक्त,कोकण भवन में तत्कालीन महापौर जावेद दलवी के दायर याचिका क्रमांक 1/2019 के सुनवाई निर्णय में मुख्यमंत्री के आदेशानुसार चुनाव लड़ने के लिए 6 साल तक बैन लगा दिया है।


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