भिवंडी में बवाल बा – ‘रईस शेख हमार बा !’

मनपा चुनाव में विधायक रईस शेख बने हर दल की ज़रूरत, सियासी गुणा-भाग तेज


भिवंडी। भिवंडी महानगरपालिका चुनाव की रणभेरी बजते ही सियासी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में जोरदार चुनाव प्रचार शुरू हो चुका है और इस पूरे चुनावी संग्राम के केंद्र में एक ही नाम सबसे ज्यादा गूंज रहा है—समाजवादी पार्टी के विधायक रईस कासम शेख। हालात ऐसे हैं कि हर पार्टी, हर उम्मीदवार और यहां तक कि निर्दलीय प्रत्याशी भी अपने-अपने तरीके से यह जताने में जुटे हैं कि “रईस शेख हमार बा”।

उम्मीदवारों में असमंजस, रईस शेख की भूमिका पर नजर.........

मनपा चुनाव को लेकर सबसे दिलचस्प स्थिति समाजवादी पार्टी के भीतर देखने को मिल रही है। जहां एक ओर सपा के उम्मीदवार विधायक रईस शेख के खुलकर मैदान में उतरने का इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राकांपा (शरद पवार गुट) और कांग्रेस के उम्मीदवारों के प्रचार में खुद रईस शेख सक्रिय नजर आ रहे हैं। इससे सपा के स्थानीय कार्यकर्ताओं और प्रत्याशियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पार्टी सूत्रों की मानें तो सपा उम्मीदवारों को उम्मीद है कि अंतिम चरण में विधायक शेख उनके लिए खुलकर प्रचार करेंगे, लेकिन फिलहाल तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही है।

बैनर-पोस्टरों पर छाए रईस शेख.....

शहर में जगह-जगह लगे चुनावी बैनर, पोस्टर और होर्डिंग्स पर विधायक रईस शेख की तस्वीर आम बात हो गई है। खास बात यह है कि इन पोस्टरों पर सिर्फ सपा ही नहीं, बल्कि राकांपा, कांग्रेस और यहां तक कि अपक्ष उम्मीदवार भी रईस शेख के साथ अपनी नजदीकी दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मतदाताओं को यह संदेश देने की होड़ लगी है कि हर उम्मीदवार को विधायक शेख का आशीर्वाद और समर्थन हासिल है। यही वजह है कि गलियों से लेकर मुख्य सड़कों तक एक ही नारा सुनाई दे रहा है—

“महाराष्ट्र में बवाल बा – रईस शेख हमार बा।”

मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में निर्णायक प्रभाव....

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भिवंडी के मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में रईस शेख की मजबूत पकड़ है। उनके समर्थन या संकेत मात्र से चुनावी गणित बदल सकता है। यही कारण है कि लगभग हर पार्टी उन्हें अपने पाले में दिखाने की कोशिश कर रही है, चाहे वह औपचारिक समर्थन हो या सिर्फ पोस्टर-बैनर तक सीमित रणनीति।

चुप्पी भी बना रही है सस्पेंस

अब तक विधायक राईस शेख की ओर से किसी एक पार्टी या सूची के पक्ष में खुला ऐलान नहीं किया गया है। उनकी यह चुप्पी चुनावी सस्पेंस को और गहरा कर रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आखिरी वक्त में उनका फैसला कई वार्डों का रुख तय कर सकता है।

नतीजों पर टिकी निगाहें ---

भिवंडी मनपा चुनाव अब सिर्फ स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह विधायक राईस शेख की राजनीतिक हैसियत और प्रभाव का भी इम्तिहान बन चुका है। सवाल यही है कि आखिर “हमार बा” का दावा किसका सही साबित होगा, इसका जवाब तो आने वाले चुनावी नतीजे ही देंगे।

रिपोर्टर

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