भिवंडी मनपा में महापौर को लेकर सियासत तेज

सेकुलर फ्रंट का दावा, सपा को उपमहापौर पद का ऑफर --- सांसद सुरेश गोपीनाथ म्हात्रे


भिवंडी। भिवंडी महानगरपालिका में महापौर पद को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सेकुलर फ्रंट ने महापौर पद पर अपना दावा ठोकते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) को उपमहापौर पद देने का प्रस्ताव रखा है। सांसद सुरेश गोपीनाथ म्हात्रे ने स्पष्ट कहा है कि मनपा में सेकुलर फ्रंट का ही महापौर होना चाहिए और इसके लिए प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

सांसद सुरेश म्हात्रे ने बताया कि जब सेकुलर फ्रंट की स्थापना हुई थी, तब कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद गट) और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एक साथ आए थे। फिलहाल कांग्रेस के 30 और राकांपा के 12 नगरसेवक मिलाकर कुल 42 सदस्य सेकुलर फ्रंट के साथ हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी के 6 नगरसेवकों ने दूरी बना ली है, जिससे राजनीतिक समीकरण प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी के सभी छह विजयी नगरसेवकों और उनके क्षेत्रों के नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि जनता अपने प्रतिनिधियों को सेकुलर फ्रंट के साथ आने के लिए समझाए। उन्होंने कहा कि सेकुलर विचारधारा को मजबूत करने के लिए सभी सहयोगी दलों का साथ आना जरूरी है। सांसद म्हात्रे ने यह भी कहा कि सेकुलर फ्रंट समाजवादी पार्टी को सम्मान देते हुए उपमहापौर पद देने के लिए तैयार है, ताकि गठबंधन मजबूत रहे और स्थिर नेतृत्व मिल सके। हालांकि उन्होंने चेतावनी भी दी कि यदि अगले दो दिनों में समाजवादी पार्टी का रुख स्पष्ट नहीं हुआ, तो सेकुलर फ्रंट छोटे दलों और अन्य पक्षों के साथ मिलकर अपना महापौर बनाने का निर्णय ले सकता है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस को 30 सीटों के साथ जनता ने सबसे बड़ा जनादेश दिया है और राकांपा के 12 नगरसेवकों का समर्थन भी उनके साथ है। ऐसे में सेकुलर फ्रंट के पास मजबूत संख्या बल है और महापौर पद पर उनका अधिकार बनता है। भिवंडी मनपा में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कारण छोटे दलों और गठबंधनों की भूमिका अहम हो गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में महापौर चुनाव को लेकर नए समीकरण बन सकते हैं और गठबंधन की राजनीति निर्णायक साबित होगी।

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