भिवंडी के पावरलूम उद्योग में गहराया मजदूर संकट

◼️कारखानों में तालाबंदी की नौबत,मालिकों की नींद हराम


◼️उत्तर भारत की तरफ जाने वाली ट्रेनों में भारी भीड़ 

भिवंडी। ईरान-इजरायल युद्ध के कारण पैदा हुई गैस की किल्लत,स्कूल में गर्मियों की छुट्टी, मुलुक में शादी विवाह का सीजन तथा फसल की कटाई के लिए हजारों मजदूरों का भारी संख्या में मुलुक की तरफ पलायन से भिवंडी के पावरलूम उद्योग में भीषण मजदूर संकट पैदा हो गया है।इस कारण सैकड़ों लूम कारखानों में तालाबंदी की नौबत आ गई है।वही ज्यादातर कारखाने एक ही शिफ्ट में चल रहे है।जिसके कारण लूम मालिकों की नींद हराम हो गई है।वही कल्याण रेलवे स्टेशन पर उत्तर भारत की तरफ जाने वाले ट्रेनों में भारी भीड़ हो रही है।ट्रेन पकड़ने के लिए मजदूरों को भीड़ के कारण दो दिन तक प्लेटफार्म पर गुजारना पड़ रहा है।इतना ही नही मजदूरों की कमी से यहां हर उद्योग धंधे प्रभावित हो रहे है।

उल्लेखनीय है कि देश के सबसे बड़े पावरलूम नगरी भिवंडी में छह लाख के आस पास पावरलूम चलते है।जिसमे तकरीबन ढाई लाख मजदूर काम करते है। 80 प्रतिशत मजदूर उत्तर हिंदुस्तान से आकर पावरलूम कारखानों में बारह-बारह घंटे की दो शिफ्ट में कमरतोड़ मेहनत करते हैं।इन दिनों युद्ध के कारण पैदा हुए गैस की तकलीफ के अलावा गर्मी के सीजन में फसल की कटाई, मुलुक में होने वाले शादी विवाह के सीजन तथा गर्मियों में बच्चों की स्कूल की छुट्टी होने के कारण बड़ी संख्या में उक्त मजदूर अपने मुलुक पलायन कर रहे हैं।जिसके कारण लूम कारखानों में मजदूरों की कमी हो गई है।ज्यादातर लूम कारखानों एक ही शिफ्ट में चल रहे है।जबकि कइयों में तालाबंदी की नौबत आ गई है।लूम मालिकों का कहना है कि मजदूरों की कमी के कारण उनके कपड़े के प्रोडक्शन पर असर पड़ रहा है।कपड़े का उत्पादन इस कारण आधा हो गया है।जिसके कारण खर्च पूरा होना मुश्किल हो गया है ऐसे में उनके सामने कारखाना बंद करने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है।इधर इन दिनों उत्तर हिंदुस्तान की तरफ जाने वाली ट्रेनों में भारी भीड़ हो रही है।कल्याण रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के जनरल डिब्बे में सफ़र करने के लिए लम्बी कतारें व भीड़ इस कदर बढ़ गई है कि स्टेशन छोटे पड़ने लगे हैं।बिना रिजर्वेशन के ट्रेन में जाने वाले मजदूरों को दो दिन स्टेशन पर रह कर लाइन में लग कर अपनी बारी का इंतजार करना पड रहा है।मजदूरों में मुलुक जाने के लिए मची होड़ से कारखानों में मजदूर संकठ गहरा गया है।इस कारण तीस प्रतिशत कारखानों में ताला लग गया है।पचास प्रतिशत कारखानों में एक शिफ्ट काम हो रहा है ।जिसे मजदूरों के शहर से जाने के बाद होटल, किराना स्टोर, पान-पट्टी, ऑटोरिक्शा वालों की कमाई पर काफी बुरा असर पडा है। आसबीबी क्षेत्र में ठेले पर फल का व्यवसाय करने वाले कामिल भाई ने बताया कि सड़क पर आदमी ही नहीं दिखते है पहले से फल की बिक्री 75 फीसदी कम हो गई है।जिससे गुजर बसर करना मुश्किल हो गया है।कमोवेश यही रोना चाय की होटल, किराना की छोटी दुकान, बिस्सी ,होटल, पानपट्टी तथा मोबाइल की दूकान चलाने वालों का है।मजदूरों के जाने से भिवंडी का हर उद्योग धंधा मंदा पड़ गया है।

रिपोर्टर

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