पंचायत सरकार भवन निर्माण कार्य में मजदूरों को नहीं मिला मजदूरी, प्रखंड विकास पदाधिकारी को आवेदन सौंप श्रमिकों ने लगाया न्याय की गुहार
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- May 26, 2026
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घटांव पंचायत मुखिया व निर्माण कार्य के ठेकेदार पर मजदूरों ने लगाया वेतन भुगतान में लापरवाही का आरोप
संवाददाता रूपेश कुमार दूबे की रिपोर्ट
कैमूर-- जिला के कुदरा थाना क्षेत्र अंतर्गत घटांव पंचायत के पट्टी गांव में पंचायत भवन निर्माण कार्य में लगे मजदूरों को मजदूरी नहीं मिलने का मामला सामने आया है। मजदूरों ने वेतन भुगतान नहीं होने से परेशान होकर प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) कुदरा शांभवी श्रीवास्तव को आवेदन सौंप न्याय की गुहार लगाई है।जानकारी के अनुसार पंचायत भवन निर्माण कार्य में कार्यरत मजदूर सीताराम सदा, बुद्धू मुसहर,अमर मुसहर, शिवदानी मुसहर,लखन मुसहर,राम सकल मुसहर व सदस्य मुसहर ने आरोप लगाया है, कि उनके द्वारा करीब 15 दिनों तक निर्माण कार्य में मजदूरी किया गया है, लेकिन अब तक उन सभी का वेतन नहीं दिया गया है। मजदूरों का कहना है कि लगातार भुगतान की मांग करने के बावजूद उन्हें सिर्फ आश्वासन दिया जा रहा है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
मजदूरों ने पंचायत के मुखिया श्रीभगवान पासवान एवं निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार पर भुगतान में लापरवाही का आरोप लगाया है। पीड़ित मजदूरों का कहना है कि मेहनत करने के बाद भी मजदूरी नहीं मिलना गरीब परिवारों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गया है।
मजदूरों का आरोप मानसिक रूप से भी किया जा रहा प्रताड़ित
संबंध में संबंधित ठेकेदार से जब दूरभाष के माध्यम से संपर्क करने का कोशिश किया गया तो तथाकथित ठेकेदार द्वारा कोई प्रतिक्रिया नहीं दिया गया। वहीं मजदूरों का आरोप है कि वेतन मांगने पर उन्हें मानसिक रूप से भी प्रताड़ित किया जा रहा है।
पंचायत सरकार भवन निर्माण कार्य में लगे ठेकेदार पंजीकृत नहीं
दूसरी ओर, इस संबंध में जब पंचायत के मुखिया श्रीभगवान पासवान से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि निर्माण कार्य ठेकेदार द्वारा कराया जा रहा था, जो की मजदूरों की मजदूरी लेकर भाग गया। संबंधित ठेकेदार पंजीकृत (रजिस्टर्ड) भी नहीं है। मुखिया के इस बयान के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं।सबसे बड़ा सवाल यह है कि पंचायत भवन जैसे सरकारी निर्माण कार्य में यदि ठेकेदार रजिस्टर्ड नहीं है, तो उसे कार्य कैसे सौंपा गया? साथ ही, गरीब मजदूरों का वेतन भुगतान की जिम्मेदारी आखिर किसकी है—मुखिया की, पंचायत सचिव की या निर्माण कार्य करा रहे ठेकेदार की?
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी योजनाओं के कार्यों में लगे मजदूरों का समय पर भुगतान सुनिश्चित होना चाहिए, ताकि मेहनतकश मजदूरों को दर-दर की ठोकरें न खानी पड़ें। अब देखना यह होगा कि प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा इस मामले में क्या कार्रवाई किया जाता है व मजदूरों को उनका बकाया मेहनताना कब तक मिल पाता है। ऐसे प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा स्पष्ट किया गया की जांच कर अग्रिम कार्रवाई सुनिश्चित होगा।


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