जीडोद्वार न होने के अभाव में कुआं विलुप्त


 अनिल कुमार सिह


  ब्यूरो चीफ भोजपुर। कुआं हाथ से जमीन को खोद कर बनाया गया एक संरचना है जमीन के भीतर मौजूद प्राकृतिक जल/भूजल के लिए सबसे पुराना और महत्वपूर्ण जल संचयन प्रणालियों में से एक है ग्रामीण क्षेत्र में सदियों से लोग पीने के लिए कुएं के मीठे पानी साथ ही नहाने और धोने का उपयोग करते थे मोटर पंप के तुलना में कुएं से बाल्टी और रस्सी के मदद से पानी बिना बिजली के भी आसानी से निकाला जा सकता है आपातकालीन स्थिति में पानी का एक स्वतंत्र और सुरक्षित स्रोत है कुआं के पानी में कई प्राकृतिक खनिज कैल्शियम मैग्नीशियम घुले होते हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है इसके अलावा भारतीय परंपराओं में कुएं को पवित्र जल स्रोत माना जाता है

सरकार द्वारा जल संरक्षण और जिडोद्वार के लिए समय-समय पर कोई योजना चलाती रहती है जल जीवन हरियाली ,रोजगार एंड मिशन के तहत कुआं,आहर,पईन,तालाब जीडीद्वार करना होता है जिससे बारिश के दौरान खुला हुए कुएं अक्सर बारिश के पानी को सोखता है जिससे जल ऊपर बना रहता है जल की संचय होने से आस पास भूजल भी स्थिति काफी सही होती है जिस तरह से विभाग की योजना चलाई जा रही है उस तरह जमीनी हकीकत देखने को नहीं मिल रही है।

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