गयाजी के क्षितिज कश्यप ने पहनी सेना की वर्दी, दादा-दादी और माता-पिता का बढ़ाया मान

क्रेन स्कूल गया से पढ़ाई, दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीतिक विज्ञान में स्नातक के बाद पहले ही प्रयास में हासिल की सफलता


गयाजी। अफसर प्रशिक्षण अकादमी (ओटीए), चेन्नई के पासिंग आउट परेड के अंतिम पग के साथ गयाजी के लाल क्षितिज कश्यप ने अधिकारी कैडेट के रूप में अपना प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर भारतीय सेना में शामिल होकर जिले का नाम रोशन किया। अंतिम पग पार करते समय उनके चेहरे पर आत्मविश्वास और आंखों में देशसेवा का जज्बा साफ नजर आया।


नियाजीपुर पोस्ट कुजापी, गया के रहने वाले क्षितिज कश्यप ने बताया कि उनके परिवार ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उनके दादा नरेन्द्र कुमार सिंह सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक, दादी श्यामा कुमारी सेवानिवृत्त शिक्षिका हैं। उनके पिता किसान हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। क्षितिज ने गया के क्रेन स्कूल से स्कूली शिक्षा प्राप्त की और दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीतिक विज्ञान में स्नातक किया। सेना में अधिकारी बनने के अपने पहले ही प्रयास में उन्होंने सफलता हासिल की।


क्षितिज ने कहा कि उन्हें बचपन से ही भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करने का जुनून था। ओटीए के प्रशिक्षण ने उन्हें एक युवा से अधिक जिम्मेदार और आत्मविश्वासी व्यक्ति बनाया। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान अनुशासन, नेतृत्व, टीम भावना और जिम्मेदारी का महत्व सीखा। कठिन शारीरिक प्रशिक्षण ने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाया।


उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान समय प्रबंधन भी बड़ी चुनौती थी। प्रतिदिन शारीरिक प्रशिक्षण, कक्षाएं, ड्रिल, खेल और अन्य गतिविधियों से दिन पूरी तरह व्यस्त रहता था। गर्मी के मौसम में प्रशिक्षण विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण रहा, जिसने हर परिस्थिति और देश के किसी भी हिस्से में तैनाती के लिए तैयार किया। क्षितिज ने बताया कि सैन्य प्रशिक्षण के दौरान सम्मान, कर्तव्य, साहस और निस्वार्थ सेवा जैसे भारतीय सैन्य मूल्यों को आत्मसात करने का अवसर मिला। वरिष्ठ अधिकारियों, कनिष्ठों और साथी अधिकारियों के प्रति सम्मान तथा सैन्य परंपराओं और शिष्टाचार की सीख भी प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा रही।


उन्होंने कहा कि सिविलियन पृष्ठभूमि से आने के कारण सैन्य जीवन उनके लिए बिल्कुल नया अनुभव था। शुरुआती दौर में अनुशासन, सुबह जल्दी उठना, शारीरिक चुनौतियों और नियमित दिनचर्या के साथ तालमेल बैठाना कठिन रहा। शारीरिक और मानसिक थकान के बावजूद हर दिन समान ऊर्जा और एकाग्रता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती थी। इस दौरान कोर्समेट, परिवार और दोस्तों के सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।


क्षितिज ने कहा कि ओटीए से मिली शिक्षा और मूल्यों को वह जीवन के हर क्षेत्र में अपनाएंगे। अनुशासन, ईमानदारी, साहस, टीम भावना और जिम्मेदारी उनके सैन्य जीवन का आधार रहेगा। उन्होंने भारतीय सेना की गरिमा और परंपराओं को बनाए रखते हुए पूरी निष्ठा, विनम्रता और समर्पण के साथ राष्ट्र की सेवा करने का संकल्प लिया।

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