नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए धड़ल्ले से किया जा रहा सैरात के नाम पर रंगदारी

क्या पदाधिकारीयों की मर चुकी है आत्मा 

स्थानीय पदाधिकारी का एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप, वरिय पदाधिकारी जिम्मेवारियों से छुड़ा रहे पाला

अखिल भारतीय समाचार टीम 

कैमूर---- जिले के कुदरा नगर पंचायत के टेंडर स्वामी द्वारा नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए धड़ल्ले से कराया जा रहा अवैध वसूली। आपको बताते चलें कि नगर पंचायत से गुजरने वाले मुख्य सड़क जैसे नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे या मुख्य जिला सड़क पर या उसके ठीक किनारे गाड़ियों को रोककर सैरात या तहबाजारी की वसूली करना पूरी तरह अवैध है।सैरात जैसे हाट, बाजार, मेला या पार्किंग की वसूली के नियम बहुत स्पष्ट हैं की मुख्य सड़कों पर अनुमति नहीं है।नगर निकाय या जिला परिषद के टेंडर का हवाला देकर भी मुख्य सड़क से गुजरने वाले वाहनों से किसी भी प्रकार का पार्किंग शुल्क या टोल जैसी वसूली करना पूरी तरह से गैर-कानूनी और रंगदारी की श्रेणी में आता है। पर कुदरा नगर पंचायत के सैरात टेंडर स्वामी द्वारा धड़ल्ले से कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग 19 नगर पंचायत कुदरा भभुआं मोड़ पर सैरात वसूली के हवाला देते हुए प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में रंगदारी टैक्स वसूला जा रहा है--


स्थानीय पदाधिकारी का एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप, वरिय पदाधिकारी जिम्मेवारियों से छुड़ा रहे पाला

 वहीं संदर्भ में कार्य पालक पदाधिकारी उजाली राज से जब वार्तालाप किया गया तो उन्होंने बताया कि थाना प्रशासन को इसकी सूचना लिखित तौर पर भी दी गई है। तो थाना अध्यक्ष प्रियेश प्रियदर्शी--


के द्वारा कहा गया कि हमें नगर पंचायत कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा किसी भी तरह की कोई सूचना नहीं दी गई है। साथ ही उन्होंने कहा कि सैरात की वसूली कहां कहां किया जाना है, इस संदर्भ में हमें कोई जानकारी नहीं है। अब यह सोचने का विषय है, कि एक थाना क्षेत्र की प्रशासनिक जिम्मेवारी जिस व्यक्ति के कंधे पर हो उसे यही नहीं पता हो कि क्या वैध है, और क्या अवैध है? वही संदर्भ में सूचना मिलने के बाद जिला के वरिय पदाधिकारी जिला पदाधिकारी, जिला विकास उप आयुक्त, जिला आरक्षी अधीक्षक अपनी-अपनी जिम्मेवारियों से पाल झाड़ते दिखें।

 क्या आगे उठाएंगे जिम्मेवारियां या आत्मा मर चुकी है 

अब देखना यह होगा कि मामला चर्चा में आने के बाद शासनिक प्रशासनिक पदाधिकारी क्या करते हैं? अवैध धन उगाही में लिप्त हो इनकी चक्क आत्मा मर चुकी है, या आत्मा को जीवित रख जिम्मेवारी निभाते हुए सैरात के नाम पर रंगदारी टैक्स वसूलने व वसूलवाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई किया जाता है।

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