पुलिस को उस व्यक्ति से शांतिभंग की आशंका जो दो पैरों पर खड़ा भी नही हो सकता

दिव्यांगजन की सहायता करने के बजाय प्रताड़ना में जुटी पुलिस

सरपतहां (जौनपुर) :पूर्व एस ओ सरपतहाँ ने विकलांग व्यक्ति की मदद करने के बजाए उसे ही शांति भंग की संभावना का मुजरिम बनाया है।  अगर यह पैसे या दबाव के प्रभाव का खेल नहीं तो यह कैसे सम्भव है कि जो व्यक्ति खुद के दो पैरों पर खड़ा तक नहीं हो सकता वह व्यक्ति शांति भंग में सक्षम होगा। पीड़ित विनोद सिंह की मदद करने के बजाय थाना सरपतहाँ के एस ओ ने इस तरह का कार्यक्रम बनाया हैं कि जिससे विकलांग व्यक्ति परेशान हो । बहुत ही दुखद है यह। समाज में ऐसे अधिकारी जब तक कार्यरत रहेंगे कानून की व्यवस्था का दुरुपयोग कर न्याय को सदैव पीड़ा देने का कार्य करेंगे। ऐसे कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही होनी चाहिये। विकलांग व्यक्ति की मदद करने के बजाय उल्टे उसको ही अपराधी बनाने का प्रयास कर  योगी सरकार की न्याय व्यवस्था को ठेंगा दिखाने का कार्य कर रहे हैं ऐसे कर्मचारी। 


ज्ञात हो कि विगत 4 जून को लौंदा ग्राम में विनोद सिंह के बच्चों को उनकी अनुपस्थिति में उनके भाई व पिता आदि द्वारा मारा पीटा गया तथा घर छोड़ने को धमकाया गया था । जिस सम्बन्ध में विनोद ने तहरीर दी  किन्तु पुलिस नहीं आई । बाद में 5 जून को विनोद सिंह के परिवार को पुनः पीटा गया जिससे पीड़ित विनोद सिंह बच्चों सहित थाने पर गए किन्तु एस ओ ने डाँटकर भगा दिया। 6 जून को एस पी जौनपुर के पास जाने पर उन्होंने फ़ोन पर एस ओ से बात की तो बताया गया कि 4 जून को मुकदमा दर्ज कर जाँच की जा रही है। अभी तक इस मामले की जांच ही चल रही है । अब उल्टे विनोद को ही 107/111 के तहत  शांति भंग का दोषी बताकर नोटिस भेजा गया है।

रिपोर्टर

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