
भिवंडी में फर्जी बंटी बबली पत्रकारों की टोली सक्रिय
- महेंद्र कुमार (गुडडू), ब्यूरो चीफ भिवंडी
- Dec 01, 2020
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भिवंडी।। भिवंडी शहर में त्योहार अथवा चुनाव आते ही कई फर्जी बंटी बबली पत्रकारों की टोली सक्रिय हो जाती है.चुनाव अथवा त्यौहारों के समय प्रशासनिक कार्यालयों अथवा नेताऒं के यहां ऐसी फर्जी पत्रकारों की टोली देखी जा सकती है.आश्चर्य की बात है ऐसे बंटी बबली पत्रकारों को पढ़ने अथवा लिखने का ज्ञान नहीं होता किन्तु अपने वाकपटुता के आधार पर पत्रकर बनकर अधिकारी तथा नेताओं को ब्लैक मेल कर रफूचक्कर हो जाते है।
देश सहित शहर में बीते दिनों दीपावली उत्सव का समापन हुआ है.इस उत्सव में शहर में लगभग 250 सौं से ज्यादा फर्जी पत्रकारों की पैदावार हो गयी.यही नहीं इन फर्जी पत्रकारों की टोली को अधिकारियों सहित नेताओं के यहाँ लोगों ने देखा।जिन्हे पत्रकारिता के ABCD का ज्ञान नहीं वो अपने दो चाकिया वाहनों पर बबली अथवा बंटी रुपी साथी को बिठाकर अधिकारियों और नेताओं को ब्लैकमेल करते देखे गये। इनमें से कईयों के अखबार कई वर्षों से बंद है या समाचार पत्रो का रजिस्टेशन कार्यालय दिल्ली ने इनके अखबारों को "D"ब्लाक कर दिया है। ऐसे पत्रकार अपने को पत्रकार सबित करने के लिए सोसल मीडिया पर न्युज जैसा विडियो बनाकर कभी- कभी वायरल कर देते है।
आश्चर्य की बात है कि इन फर्जी पत्रकार बंद अखबार के संपादक बनकर अपने दो चाकिया वाहनों पर पत्रकार अथवा प्रेस लिखवाकर पूरे दिन शहर में शिकार की तलाश में भटकते रहते है यही नहीं ऐसे पत्रकारों के पास किसी प्रकार का व्यवसाय अथवा कारोबार नहीं होने के बावजूद मालामाल रहते है इसके अलावा कुछ पत्रकार संगठना अथवा पत्रकारों का संघ चलाने वाले ऐसे पत्रकारों को जोड़कर अपनी संगठना अथवा संघ को मजबूत कर लेते है उसके बाद उनका भी धंधा शुरू हो जाता है। इन्ही फर्जी पत्रकारो का मुखिया बनकर रोजी रोटी के जुगाड़ में मुखिया भी शिकार की तलाश में जुट जाता है। सुत्रों की माने ऐसे फर्जी बंटी - बबली पत्रकारों की जोड़ी कल्याण, ठाणे,नवीं मुंबई, पालघर आदि शहरों में घूमकर अवैध धंधों से वसूली का काम करती है.यही नहीं सरकारी कार्यालयों में फाईल को लेकर भटक रहे नागरिक भी इनके शिकार बन जाते है.राशन कार्यालय में राशन कार्ड बनवा देना, मनपा मुख्यालय से जन्म मृत्यु दाखला, तहसीलदार कार्यालय से सात बारा ट्रांसफर करवा देने का बहाना कर लोगों को ठग लिये जाने की कई घटनाएं शहर में घटित हो चुकी है इसके अलावा इन फर्जी पत्रकारों को मनोबल इतना बढ़ गया है कि पुलिस स्टेशनों सहित कंटोल रुम में फोन कर वकायदे शिकायतें भी दर्ज करवाई जाती है। क्या कभी पुलिस ऐसे फर्जी पत्रकारों पर अंकुश लगा पायेगी.जिसे लगातार गिर रहे पत्रकारिता का स्तर को बचाया जा सकें।
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