व्यसन से निजाद पाने में पंचकर्म थेरपी सबसे कारगर है : प्रोफेसर ओपी सिंह

जौनपुर ।। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में नव स्थापित नशा मुक्त एवं पुनर्वास केंद्र द्वारा 'मिशन ड्रग फ्री केंपस एंड सोसाइटी' के तहत 12-26 जून, तक नशा मुक्ति हेतु मनाए जाने वाले जन जागरूकता पखवाड़ा कार्यक्रम के अंतर्गत शुक्रवार को एक ई-कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसका विषय 'मादक पदार्थों एवं द्रव्यों के दुष्परिणाम से बचने एवं रोकथाम में परंपरागत चिकित्सा पद्धति (होम्योपैथी एवं आयुर्वेद) की भूमिका' थी। कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि व वक्ता काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी के आयुर्वेद विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो० ओ.पी. सिंह ने बताया कि नशे की मुक्ति संकल्प से होती है अलग-अलग तरह के नशीले पदार्थो के सेवन और उसके दुष्परिणाम के बारे में विस्तार से बताया । उन्होंने बताया की इस तरह के व्यसन से निजाद पाने में पंचकर्म थेरपी सबसे कारगर है, जिसमे विरेचन प्रक्रिया, सात्विक आहार,  गौ आधारिक खाद सामग्रियों का प्रयोग शामिल है ।इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रकार के आयुर्वेदिक औषधियों और आयुर्वेदिक इलाज एवं रोकथाम के बारे में जानकारी प्रदान की । कार्यशाला के द्वितीय वक्ता के रूप में नशा से ग्रशित लोगों के उपचार में विभिन्न तरह के होम्योपैथी चिकित्सा विधियों का वर्णन किया तथा अपने अनुभवों को साझा किया। कार्यशाला के योग सत्र में आर्ट ऑफ लिविंग के योग प्रशिक्षक श्री राजेंद्र प्रताप सिंह ने आज कुछ नई योग क्रियाओं का अभ्यास कराया, जिसमें शीतली प्रणायाम, जो हमारे दिमाग और शरीर को ठंडा रखता, तनाव, चिंता, एवं अवसाद को दूर भगाने में रामवाण की तरह काम करता है।द्वितीय योग आसन के रूप में भस्त्रिका प्राणायाम, जो हमारे तीन दोष (वात, पित्त और कफ) से राहत दिलाने में बहुत फायदेमंद है। इसके अतिरिक्त यह हमारे ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने, हृदय के लिए लाभदायक,

वजन घटाने में सहायक, तनाव को कम करने, श्वसन संबंधी समस्याओं से दिलाए राहत आदि में लाभकरी है। तीसरे योग आसन के रूप में उज्जायी सास (लंबी गहरी सांसे) का अभ्यास कराया, को तनाव को कम करना, मन को वर्तमान में लाने, शरीर में ऊर्जा का संचार करना, क्रोध को नियंत्रित करना, प्राण ऊर्जा को बढ़ाने में कारगर है । 

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो० विक्रम देव  शर्मा ने कहा कि नशा एक मानसिक रोग है, जिससे बचने के लिए हमें योग, होम्योपैथ दवा और आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों का इस्तेमाल करना चाहिए। नशे से लोगों में आत्महत्या की प्रवृत्ति उत्पन्न होती है और इससे बचाव का तरीका अपने परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों पर विश्वास करना है । कार्यशाला का संचालन व्यवहारिक मनोविज्ञान की छात्रा हिदायत फातिमा ने की और धन्यवाद ज्ञापन इस अभियान के समन्वयक डॉ० मनोज कुमार पाण्डेय ने किया ।इसमें  कार्यशाला में प्रतिभागियों के रूप में जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ मनोज मिश्र, महिला अध्ययन केंद्र की प्रभारी डॉ जान्हवी श्रीवास्तव, डॉ अवधेश श्रीवास्तव, डॉ धीरेंद्र चौधरी, विवेक, आराधना, रिया, प्रिया, दिव्या , सोनाली, श्रुति, राजेंद्र, सत्यप्रकाश चौहान आदि सहित मौजूद रहे।

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