
भिवंडी महानगर पालिका की विफलताओं के बीच "स्वच्छ, सुंदर, अतिक्रमण मुक्त शहर" का दिखावा
- महेंद्र कुमार (गुडडू), ब्यूरो चीफ भिवंडी
- Dec 02, 2024
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जनता को मूलभूत सुविधाओं के बजाय प्रचार तक सीमित रखा गया
भिवंडी। भिवंडी निज़ामपुर शहर महानगर पालिका के "स्वच्छ, सुंदर, अतिक्रमण मुक्त शहर" अभियान को लेकर बड़े दावे किए जा रहे है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। इस अभियान ने जनता के बीच एक बार फिर महानगर पालिका की विफलताओं को उजागर कर दिया है।
स्वच्छता के दावे और कचरा प्रबंधन की विफलता ::::
भिवंडी की सड़कों और मुख्य चौराहों पर बेतरतीब कचरे के ढेर देखे जा सकते हैं। नगर पालिका के पास कचरे के नियमित उठाव की कोई ठोस योजना नहीं है। कई क्षेत्रों में लोग गंदगी और दुर्गंध के बीच जीने को मजबूर हैं। क्या यह स्वच्छता अभियान केवल फोटो खिंचवाने तक सीमित है ।स्थानीय निवासी रमेश यादव कहते हैं, "महानगर पालिका केवल स्वच्छता दिवस पर सफाई करती है। बाकी दिन कचरा सड़कों पर पड़ा रहता है। हमें खुद अपने इलाकों की सफाई करनी पड़ती है।"
पानी की किल्लत और टूटी-फूटी पाइपलाइनें :::
भिवंडी में पीने के पानी की आपूर्ति एक बड़ी समस्या बनी हुई है। अधिकांश इलाकों में पानी की पाइपलाइनें पुरानी और क्षतिग्रस्त हैं, जिससे पानी की बर्बादी और गंदे पानी की सप्लाई होती है। इसके बावजूद महानगर पालिका पानी की इस समस्या का समाधान करने में विफल रही है। झुग्गी क्षेत्र की एक महिला बताती हैं, "हमें पीने का साफ पानी तक नहीं मिलता। हम गंदा पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे बीमारियां फैल रही हैं। क्या यह प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है ?"
सड़कें और यातायात व्यवस्था ध्वस्त ::::
भिवंडी की सड़कों की हालत बदतर हो चुकी है। गड्ढों से भरी सड़कों पर चलना मुश्किल है और बरसात के मौसम में हालात और खराब हो जाते हैं। यातायात जाम और अव्यवस्थित पार्किंग ने आम नागरिकों का जीवन दूभर कर दिया है। महानगर पालिका ने अब तक सड़कों के मरम्मत और यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। एक ऑटो चालक का कहना है, "हमारे वाहन खराब सड़कों की वजह से जल्दी टूट जाते हैं। हमें रोजाना नुकसान उठाना पड़ता है।"
अतिक्रमण हटाओ अभियान की असमानता :::
भिवंडी महानगर पालिका के अतिक्रमण हटाओ अभियान में केवल छोटे व्यापारियों और गरीबों को निशाना बनाया जा रहा है। बड़े प्रभावशाली लोगों द्वारा किए गए अवैध निर्माणों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह दिखाता है कि यह अभियान केवल कमजोर वर्गों को परेशान करने के लिए है। स्थानीय व्यापारी संगठन ने आरोप लगाया है कि "प्रशासन केवल छोटे लोगों को हटाने पर ध्यान दे रहा है। बड़े मॉल और अवैध इमारतों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही।"
शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की अनदेखी :::
महानगर पालिका द्वारा संचालित स्कूलों और अस्पतालों की स्थिति भी बेहद दयनीय है। स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक और संसाधन नहीं हैं। वहीं, सरकारी अस्पतालों में दवाइयों की कमी और खराब प्रबंधन के कारण मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।
विकास के नाम पर केवल राजनीति ::::
महानगर पालिका के ये तमाम मुद्दे दिखाते हैं कि "स्वच्छ, सुंदर, अतिक्रमण मुक्त शहर" अभियान केवल जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास है। असली विकास तभी संभव है जब प्रशासन मूलभूत समस्याओं पर ध्यान दे। अगर महानगर पालिका को वास्तव में शहर को विकसित करना है, तो उसे कचरा प्रबंधन, पानी की आपूर्ति, सड़क मरम्मत, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में प्राथमिकता देनी होगी। साथ ही, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए।जब तक प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों को सही तरीके से नहीं निभाता, तब तक ये अभियान केवल दिखावा और जनता के साथ अन्याय ही साबित होंगे।
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