'खाड़ी' को 'नदी' बताकर उगाही का खेल !

हजारों परिवार के सामने रोजी रोटी का संकट


भिवंडी।  भिवंडी- निजामपुर शहर महानगर पालिका की सीमा में आते ही कामवारी नदी का अस्तित्व समाप्त हो जाता है और वह एक खाड़ी का रूप ले लेती है। लेकिन कुछ तथाकथित पर्यावरण प्रेमियों और अवैध वसूली करने वालों ने इस खाड़ी को जबरन 'नदी' घोषित कर, यहां संचालित लघु उद्योगों से उगाही का नया तरीका ढूंढ निकाला है। इस प्रकार का आरोप सामाजिक कार्यकर्ता अब्दुल गनी खान ने शासन को एक पत्र देकर लगाया है। 

कामवारी नदी का प्राकृतिक प्रवाह लगभग दो किलोमीटर पहले ही समाप्त हो जाता है, और इस जगह शासन ने एक बांध भी बना रखा है। बांध के बाद जो जलधारा बहती है, वह वास्तव में एक खाड़ी है, जहां आसपास की खोणी और शेलार ग्राम पंचायतों सहित भिवंडी महानगर पालिका के नालों का पानी आकर मिलता है। इसके बावजूद, कुछ स्वयंभू पर्यावरण कार्यकर्ता इस खाड़ी को 'नदी' साबित करने में जुटे हैं और लघु उद्योगों को जबरन पर्यावरणीय उल्लंघन का दोषी ठहराकर अवैध वसूली कर रहे हैं।भिवंडी की यह खाड़ी किनारे बसे छोटे-बड़े लघु उद्योगों का केंद्र है, जहां हजारों श्रमिक कार्यरत हैं। इन उद्योगों के कारण लाखों लोगों की आजीविका चल रही है, लेकिन जबरन 'नदी' घोषित कर इन पर प्रतिबंध लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों ने इस मामले में शासन-प्रशासन से उचित जांच की मांग की है, ताकि पहले सही तथ्यों को समझा जाए और फिर कोई कार्रवाई की जाए। इस पूरे मामले में प्रशासन की निष्क्रियता भी सवालों के घेरे में है। क्या सरकार और स्थानीय अधिकारी इस गहरी साजिश को उजागर करेंगे, या लघु उद्योगों का गला घोंटकर कुछ स्वार्थी तत्वों की जेबें भरने देंगे? यह आने वाला वक्त ही बताएगा!

रिपोर्टर

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