भिवंडी की आपातकालीन व्यवस्था लावारिस अधिकारी के हवाले, प्रशासन की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल.
- महेंद्र कुमार (गुडडू), ब्यूरो चीफ भिवंडी
- Jun 24, 2025
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भिवंडी। भिवंडी महानगरपालिका की आपातकालीन व्यवस्था इस समय पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो चुकी है। मानसून की शुरुआत के साथ ही शहर में दो बड़ी दुर्घटनाएं हुईं, जिनसे न केवल नागरिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं, बल्कि पालिका प्रशासन की लापरवाही और गैरजिम्मेदारी भी उजागर हो गई है। पहली घटना में एक धोखादायक घोषित इमारत की दीवार गिरने से एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। वहीं दूसरी घटना गायत्री नगर के पहाड़ी क्षेत्र में हुई, जहाँ भारी बारिश के कारण पहाड़ी खिसक गई और कई पेड़ पास के मकानों पर गिर गए। इस हादसे में पाँच मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गए। सौभाग्यवश कोई जानमाल की हानि नहीं हुई, लेकिन यह प्रशासन के लिए एक चेतावनी थी — जिसे नजरअंदाज कर दिया गया। इस संकट की घड़ी में, भिवंडी पालिका की आपातकालीन शाखा पूरी तरह निष्क्रिय रही। कारण? विभाग के प्रमुख साकिब खर्बे को बिना कोई स्पष्ट सूचना या वैकल्पिक व्यवस्था के ‘लावारिस अधिकारी’ घोषित कर दिया गया है। इस विभाग की अतिरिक्त जिम्मेदारी दमकल विभाग के प्रमुख राजेश पवार को सौंप दी गई है, जो पहले से ही ठाणे जिले की अग्निशमन सेवाओं की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।चौंकाने वाली बात यह है कि चार्ज मिलने के बाद से श्री पवार एक बार भी कार्यालय में उपस्थित नहीं हुए हैं। ऐसे में पूरे आपातकालीन विभाग का संचालन अधर में लटका हुआ है। इसका सीधा असर नागरिकों की सुरक्षा और आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई पर पड़ रहा है।शहरवासियों को पालिका में आईएएस अधिकारी अनमोल सागर की नियुक्ति से यह उम्मीद थी कि भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता आएगी। लेकिन सच्चाई इसके ठीक उलट सामने आ रही है। पूर्व आयुक्त अजय वैद्य की कार्यशैली को ही आगे बढ़ाते हुए वर्तमान आयुक्त ने भी एक संवेदनशील विभाग को लावारिस छोड़ दिया है।
यह एक गहरी चिंता का विषय है कि आपातकालीन विभाग जैसी महत्वपूर्ण इकाई को बिना स्थायी और जिम्मेदार अधिकारी के हवाले कर दिया गया है। यह निर्णय न केवल अदूरदर्शिता को दर्शाता है, बल्कि इससे नागरिकों की जान जोखिम में डाली जा रही है।मानसून के इस खतरनाक मौसम में भिवंडी जैसे घनी आबादी वाले शहर को हर पल आपात स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन जब प्रशासन ही तैयार नहीं, तो आम नागरिक किस पर भरोसा करे? न तो उपकरणों की व्यवस्था है, न ही कर्मचारियों का समुचित मार्गदर्शन, और न ही संकट प्रबंधन की कोई ठोस योजना।नगरपालिका के इस उदासीन रवैये से शहर में रोष की लहर दौड़ रही है। नागरिकों का कहना है कि अगर यही हाल रहा, तो आने वाले दिनों में भिवंडी को किसी बड़ी आपदा का सामना करना पड़ सकता है — और उसकी पूरी जिम्मेदारी पालिका प्रशासन की होगी।
जरूरत इस बात की है कि आयुक्त तुरंत हस्तक्षेप करें और आपातकालीन विभाग को एक पूर्णकालिक, सक्रिय और अनुभवी अधिकारी सौंपें। केवल अतिरिक्त चार्ज देकर या जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़कर आपदाओं को नहीं रोका जा सकता। समय रहते चेतना होगा, वरना हालात हाथ से निकलने में देर नहीं लगेगी।हम इस मुद्दे पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और नागरिकों की आवाज को प्रशासन तक पहुँचाते रहेंगे।


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