केंद्र व राज्य सरकारों के श्रम विरोधी कानूनों के खिलाफ भिवंडी में ट्रेड यूनियनों का जोरदार प्रदर्शन
- महेंद्र कुमार (गुडडू), ब्यूरो चीफ भिवंडी
- Jul 09, 2025
- 131 views
भिवंडी । केंद्र सरकार द्वारा देश के 29 श्रम कानूनों को समाप्त कर चार श्रम संहिताओं में बदलने के खिलाफ पूरे देशभर में विरोध तेज हो गया है। ट्रेड यूनियनों का आरोप है कि इन नई श्रम संहिताओं से मजदूरों की सुरक्षा खत्म हो जाएगी और उन्हें बंधुआ मजदूरी जैसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा। इसी के विरोध में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा आहूत भारत बंद के तहत भिवंडी में मजदूर संघ संयुक्त कार्रवाई समिति द्वारा जोरदार प्रदर्शन किया गया।
यह विरोध प्रदर्शन सीटू संगठन के कॉमरेड सुनील चव्हाण के नेतृत्व में स्व. आनंद दिघे चौक पर किया गया। इस दौरान कॉमरेड चव्हाण ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सरकार तानाशाही रवैया अपनाते हुए राज्य की जनता की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार असंवैधानिक ‘महाराष्ट्र जन सुरक्षा विधेयक’ लाकर नागरिकों के संविधान प्रदत्त अधिकारों को छीनने की कोशिश कर रही है।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि चारों श्रम विरोधी संहिताओं को तुरंत वापस लिया जाए, महाराष्ट्र जन सुरक्षा अधिनियम को रद्द किया जाए, जो जनता की अभिव्यक्ति की आजादी को कुचलता है। इसके साथ ही प्रदर्शन के दौरान निम्नलिखित प्रमुख मांगें उठाई गईं:
पावरलूम मजदूरों के लिए पावरलूम श्रमिक कल्याण बोर्ड की स्थापना
असंगठित मजदूरों को घर बनाने के लिए ₹5 लाख की आर्थिक सहायता
रिक्शा-टैक्सी मजदूरों के लिए बनाए गए कल्याण बोर्ड में पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाना और इसके लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराना
भिवंडी के सभी पावरलूम कारखानों को कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकरण कराने को अनिवार्य बनाना
प्रदर्शन में सीटू, बीड़ी मजदूर यूनियन, रिक्शा यूनियन, अखिल भारतीय किसान सभा जैसे संगठनों के नेता व कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए। प्रमुख उपस्थितियों में अनिल त्यागी, डॉ. शुभ्रतो दासकमला गाहू, कॉ. शफीक शेख, गणेश दुमाड़ा, सूर्यभान यादव, मुमताज शेख, भोलानाथ दिनकर, कॉ. सदानंद भारती सहित कई महिला-पुरुष कार्यकर्ता शामिल रहे।इस विरोध प्रदर्शन ने भिवंडी में श्रमिकों की एकजुटता और उनके अधिकारों के लिए जारी संघर्ष को एक नई ताकत दी है।


रिपोर्टर