भिवंडी मनपा चुनाव में तीसरी आघाड़ी की चर्चा तेज, पारंपरिक दलों की मुश्किलें बढ़ीं

भिवंडी। भिवंडी-निजामपुर शहर महानगरपालिका चुनाव की सरगर्मियां तेज होते ही शहर की राजनीति में नए समीकरण बनते-बिगड़ते नजर आ रहे हैं। भाजपा, शिवसेना और अन्य प्रमुख दलों ने जहां अपने-अपने उम्मीदवार तलाशने की कवायद शुरू कर दी है, वहीं अब तीसरी आघाड़ी की संभावनाओं ने चुनावी मुकाबले को और रोचक बना दिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के साथ-साथ कई अन्य स्थानीय संगठनों व छोटे दलों के नेता भी इस नए मोर्चे का हिस्सा बन सकते हैं। बताया जा रहा है कि इन दलों से जुड़े कई पूर्व नगरसेवक तथा सक्रिय कार्यकर्ता तीसरी आघाड़ी में शामिल होने के लिए तैयार हैं। यही नहीं, पिछले कार्यकाल में राजनीतिक दलों से दूरी बना चुके कुछ अनुभवी नेता भी इस गठबंधन के माध्यम से चुनावी मैदान में उतर सकते हैं। भिवंडी महानगरपालिका की कुल 90 सीटों पर होने वाले इस चुनाव में पहले से ही कई नए चेहरे किस्मत आजमाने को तैयार हैं। ऐसे में अगर तीसरी आघाड़ी वजूद में आती है तो मुकाबला त्रिकोणी ही नहीं, बल्कि कई वार्डों में बहुकोणी भी हो सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मोर्चा अल्पसंख्यक, मजदूर वर्ग और हाशिए पर खड़े तबकों को साधने की कोशिश करेगा। इसके अलावा स्वतंत्र उम्मीदवारों के लिए भी यह गठबंधन एक मजबूत विकल्प साबित हो सकता है।

स्थानीय सूत्रों का कहना है कि अगर यह आघाड़ी मजबूत तरीके से चुनाव मैदान में उतरी तो पारंपरिक दलों को अपने-अपने उम्मीदवारों की खोज में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। उन्हें नए चेहरों पर दांव लगाना पड़ सकता है, क्योंकि कई पुराने नगरसेवक इस गठबंधन का हिस्सा बन सकते हैं। चुनावी माहौल को देखते हुए साफ है कि इस बार का महासंग्राम बेहद दिलचस्प होगा। भिवंडी की राजनीति में यह तीसरी आघाड़ी यदि सशक्त रूप से उभरती है, तो न सिर्फ बड़े दलों की रणनीतियों को चुनौती मिलेगी, बल्कि आने वाले वर्षों में शहर की सियासत की दिशा भी बदल सकती है।

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