भिवंडी महानगर पालिका में भ्रष्टाचार का नया ट्रेंड !
- महेंद्र कुमार (गुडडू), ब्यूरो चीफ भिवंडी
- Sep 25, 2025
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शाम ढलते ही यूट्यूबर और माहिती बाज पत्रकारों की भीड़, हर हफ्ते होता है ‘हिस्से’ का बंटवारा ?
भिवंडी। भिवंडी-निजामपूर शहर महानगर पालिका धीरे-धीरे भ्रष्टाचार का गढ़ बनती जा रही है। वर्षों से झोलाछाप बिल्डरों और फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करने में नाकाम साबित हुए अधिकारी अब एक नए तरह के ‘खेल’ में लिप्त दिखाई दे रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों और विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो अब भ्रष्ट अधिकारियों के कार्यालयों में शाम ढलते ही एक अजीब सी भीड़ जमा होती है।
शाम ढलते ही शुरू होती है हलचल ...
नगरपालिका मुख्यालय से लेकर विभिन्न प्रभाग समिति कार्यालयों तक, जैसे ही सूरज ढलता है, दफ्तरों का माहौल अचानक बदल जाता है। बाहर से देखने पर तो लगता है कि कामकाज अब बंद होने वाला है, लेकिन भीतर का नजारा अलग ही होता है। दर्जनों की संख्या में स्वयंभू यूट्यूबर और जानकारी देने के नाम पर सक्रिय तथाकथित पत्रकार, अधिकारियों के कमरों में घूमते नजर आते हैं।
भ्रष्टाचार की कमाई में से बंटता है हिस्सा....
पालिका के अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि कुछ भ्रष्ट अधिकारियों ने अपनी अवैध कमाई का ‘हफ्ता सिस्टम’ बना दिया है। इस सिस्टम के तहत वे अपनी रिश्वत की रकम में से हर हफ्ते 200, 500 से लेकर 2000 रुपये तक बांटकर इन यूट्यूबरों और माहिती बाज पत्रकारों को साधे रखते हैं। रकम भले ही छोटी दिखाई दे, लेकिन इन लोगों के लिए यह नियमित आय का साधन बन चुका है।
संरक्षण और सौदेबाजी का खेल........
सिर्फ पैसे बांटना ही नहीं, बल्कि इन लोगों का इस्तेमाल अधिकारियों के संरक्षण और सौदेबाजी में भी किया जाता है। सूत्र बताते हैं कि यदि किसी बिल्डर या व्यापारी के खिलाफ शिकायत करनी हो तो यही जानकारी बाज पत्रकार लिखित शिकायत दर्ज करा देते हैं। बाद में उसी शिकायत को आधार बनाकर संबंधित अधिकारी मोटी रकम लेकर मामले को दबा देते हैं। यानी शिकायत करने वाला और शिकायत निपटाने वाला, दोनों एक ही खेमे में शामिल रहते हैं।
नागरिकों में बढ़ रहा आक्रोश.......
शहर के जागरूक नागरिक इस नए ट्रेंड से बेहद नाराज़ हैं। उनका कहना है कि नगर पालिका की छवि पहले से ही भ्रष्टाचार के कारण धूमिल हो चुकी है और अब इस तरह का नया खेल आम जनता का विश्वास और भी तोड़ रहा है। नागरिकों का मानना है कि प्रशासन यदि अब भी आंखें मूंदे बैठा रहा तो आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं।
कार्रवाई की मांग.........
नागरिकों ने महानगर पालिका आयुक्त से मांग की है कि भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। इसके तहत न केवल भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज होना चाहिए, बल्कि उनके संरक्षण में पल रहे यूट्यूबरों और माहितीबाज पत्रकारों को भी चिन्हित कर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, किसी एक व्यक्ति द्वारा बार-बार की जाने वाली शिकायतों की भी जांच होनी चाहिए ताकि यह साफ हो सके कि उसके पीछे कोई स्वार्थ या सौदेबाजी तो नहीं है।
पारदर्शिता ही समाधान......
विशेषज्ञों का कहना है कि इस पूरे खेल का सबसे बड़ा शिकार आम नागरिक होता है। क्योंकि जब शिकायत और कार्रवाई दोनों ही सौदेबाजी का हिस्सा बन जाते हैं, तब आम जनता की असली समस्याएं कभी सामने ही नहीं आ पातीं। ऐसे में केवल पारदर्शिता और सख्त प्रशासनिक कदम ही भ्रष्टाचार की इस गाड़ी को रोक सकते हैं।


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