दिवाली के पहले बढ़ी “किराये के पत्रकारों” की मांग – शहर में सक्रिय हुआ वसूली गैंग !
- महेंद्र कुमार (गुडडू), ब्यूरो चीफ भिवंडी
- Oct 13, 2025
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भिवंडी । दिवाली नज़दीक आते ही भिवंडी शहर में “स्वयं घोषित पत्रकारों” की बाढ़ सी आ गई है। हालात यह हैं कि महानगर पालिका के 90 वार्डों में अगर देखा जाए तो हर वार्ड में दो-चार ऐसे लोग मिल जाएंगे जो अपने मोबाइल और माइक के बल पर “पत्रकार” बन बैठे है। ये तथाकथित पत्रकार यूट्यूब और सोशल मीडिया पर “न्यूज़” चलाकर खुद को रिपोर्टर बताते है। दिवाली से पहले इनकी सक्रियता अचानक बढ़ गई है,प्रशासनिक और सरकारी दफ्तरों में इनका आना-जाना तेज हो गया है। कैमरा और माइक के दम पर ये अधिकारीयों से सवाल करते हुए छोटे-छोटे वीडियो बनाते है और उन्हें किसी “बड़े चैनल” की तरह सोशल मीडिया पर वायरल कर देते हैं।
जानकारी के अनुसार, इनमें से ज्यादातर लोगों का पत्रकारिता से कोई लेना-देना नहीं है। न तो इन्हें खबरों की समझ है, न पत्रकारिता की आचारसंहिता का ज्ञान। फिर भी ये खुद को ‘प्रेस रिपोर्ट ’ बताते हुए अधिकारीयों पर दबाव बनाते है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ भ्रष्ट अधिकारी भी इन तथाकथित पत्रकारों का सहारा लेकर अपने भ्रष्टाचार पर पर्दा डाल रहे है। बताया जाता है कि ऐसे अधिकारी हर सप्ताह 200 से 500 रूपये तक देकर इन “पत्रकारों” को अपने पक्ष में बनाए रखते है। दिवाली के मौके पर तो बाकायदा “किराये के पत्रकारों” की मांग बढ़ जाती है। सूत्र बताते हैं कि एक पूरा नेटवर्क बन जाता है — एक “मुख्य पत्रकार” और उसके साथियों की टीम। वसूली का आधा हिस्सा यह टीम आपस में बांट लेती है।शहर के सरकारी दफ्तरों में अब इन लोगों के विजिटिंग कार्डों का अंबार लगना शुरू हो गया है। एक सरकारी बाबू ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “अभी तो शुरुआत है, सौ से ज़्यादा कार्ड जमा हो जाते है। दिवाली तक तो इतने कार्ड आ जाएंगे कि हमें दफ्तर छोड़कर घर बैठना पड़ेगा।” भिवंडी में पत्रकारिता के नाम पर चल रहा यह धंधा अब शहर की छवि पर कलंक बनता जा रहा है। सवाल यह है कि प्रशासन कब जागेगा — और कब इन “किराये के पत्रकारों” की दिवाली बंद होगी ?


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