भिवंडी के ऐतिहासिक दरगाह दीवान शाह के आसपास नशे का गढ़
- महेंद्र कुमार (गुडडू), ब्यूरो चीफ भिवंडी
- Dec 14, 2025
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गांजा,चरस,और प्रतिबंधित गुटखा की बिक्री से स्थानीय लोग परेशान
भिवंडी। शहर की ऐतिहासिक और सांप्रदायिक सौहार्द की प्रतीक दरगाह दीवान शाह (बाबा दीवान शाह) के आसपास का इलाका इन दिनों नशेड़ियों का अड्डा बनता जा रहा है। दरगाह के सामने और आसपास के क्षेत्रों में गांजा, चरस,अफीम सहित अन्य नशीले पदार्थों और प्रतिबंधित गुटखा की खुलेआम बिक्री होने की शिकायतें लगातार सामने आ रही है। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, दरगाह क्षेत्र में आए दिन पुलिस द्वारा चिलम पीने वालों और छोटे नशेड़ियों को गिरफ्तार किया जाता है, लेकिन नशीले पदार्थों के मुख्य विक्रेताओं पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। सूत्रों की मानें तो दरगाह के आसपास स्थित दर्जनों पान की दुकानों पर नशीले पदार्थ आसानी से उपलब्ध हैं, जहां से मजदूर वर्ग के लोग और युवा नशे की चपेट में आ रहे है। यह इलाका मजदूर बाहुल्य होने के कारण झुग्गी-झोपड़ियों और छोटे मकानों से घिरा हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन बस्तियों में मौजूद पान टपरियों पर नशे का हर सामान बेचा जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि इसकी जानकारी स्थानीय पुलिस को होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद हैं। इतिहास पर नजर डालें तो दरगाह दीवान शाह एक अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक स्थल है, जिसका संबंध 17वीं सदी (1657) से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि इस भूमि को छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा पवित्र किया गया था। यह दरगाह हजरत दीवान शाह उर्फ हजरत सय्यद मलिक हुसैन शाह कादरी की मजार पर बनी है, जो बगदाद से भारत आए थे और अपनी आध्यात्मिक शक्तियों के लिए प्रसिद्ध थे। हर साल यहां भव्य उरूस (धार्मिक मेला) का आयोजन होता है, जिसमें हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग बड़ी संख्या में शिरकत करते हैं। यह स्थल वर्षों से सांप्रदायिक एकता और आध्यात्मिक शांति का केंद्र रहा है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि पुलिस केवल छोटे नशेड़ियों पर कार्रवाई करने के बजाय नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री करने वाले मुख्य सरगनाओं पर सख्त कदम उठाए, ताकि इस ऐतिहासिक धरोहर की गरिमा बनी रहे और क्षेत्र को नशामुक्त किया जा सके।


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