जल निकासी ग्रामीणों के गले की बनी फांस, कहीं फसल जल मग्न तो कहीं बदबू से जनजीवन पर व्यापक असर
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Jan 03, 2026
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दुर्गावती संवाददाता श्याम सुंदर पांडेय रिपोर्ट
दुर्गावती (कैमूर)-- ग्रामीण क्षेत्रों में आहर पोखरी बड़े नालों के पानी निकलने के रास्तों और पोखरों का आतीक्रमण अतिक्रमण कारियो के द्वारा कर लिए जाने के कारण जल निकासी ग्रामीण क्षेत्रों में एक अहम समस्या बन चुकी है। जिसके कारण कहीं गांव के नजदीक के किसाने की फसल बर्बाद हो रही है तो कहीं प्रदूषण से जन जीवन अस्त-व्यस्त है तथा रोगों को आमंत्रण दे रहा है जिसके कारण आमजन बालक वृद्ध रोगो के शिकार हो रहे हैं। इसी क्रम में थाना क्षेत्र के ग्राम गोरार में ग्रामीण के घर से निकलने वाले नल जल बदबूदार शौचालय और समरसेबल के पानी से जल निकासी कि रास्ते को अतिक्रमण कारियो के द्वारा पाट कर घर बना लिए जाने से एवं बंद किए जाने से लगभा 10 एकड़ जमीन पर खेती आज भी किसान नहीं कर पा रहे है। एक फसल धान की भी खेती यदि करते भी हैं तो आज भी धान की फसल नहीं कट पाई है और गेहूं बुवाई तो दूर की बात है। किसान शिव पूजन पाल कृष्ण पाल निर्मल पासवान भिखारी शाह रामबचन पासवान रामधारी पासवान निर्मल बिंद राम परिखा बिंद राम जन्म राम सहित कई किसानों की खड़ी धान की फसल आज भी कटनी नहीं हो पा रही है। गांवों की ओर अगर सचमुच नजर दौड़ाएं तो देखने को मिलता है कि गांव के मुख्य गली लिंक गली मुख्य रास्ते गांव में प्रवेश करने वाले पथ अतिक्रमण के चपेट में है।जो सरकार की सुस्ती और वोट का खेल परिणाम है कि इन अतिक्रमण कारियो के हौसले को बुलंद कर रखा है ।
इन लोगों के पास न कानून का भय है न समाज का खौफ जिसका कारण है कि अतिक्रमण कारियो के हौसले बुलंद है। उसी क्रम में थाना क्षेत्र के ही ग्राम दहियाव में अतिक्रमण की चपेट में जल निकासी का मार्ग और सार्वजनिक पोखरी तथा रास्ता होने के कारण पानी घरों से निकल कर गड्ढे में इकट्ठा हो रहा है और हो गया है यदि देखे तो उसका रंग ऐसा लग रहा है कि भयंकर मानो काल को आमंत्रण दे रहा है दुर्गंध और बदबू तो ऐसी है मानो दूर से देखने में लग रहा है कि विष ही भरा हुआ है। अतिक्रमण की समस्या गावो के साथ साथ शहर के चौक चौराहे सार्वजनिक स्थलो पर भी खुलेआम दिखाई दे रहा हैं। सरकार के द्वारा अतिक्रमण के खिलाफ चलाए जा रहे हैं अभियान में सरकार कितना सफल होती है यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि क्या गांव का और शहर की अतिक्रमण के समस्याओं का पूरा हाल हो पाएगा या नहीं।


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