कल्याण पूर्व वार्ड 12 में राकांपा उम्मीदवार की दावेदारी पर सवाल, जनता के बीच गहराता संशय

क्या ? अप्पा शिंदे के कार्यो को दिखा जीत हासिल कर पाएंगे विक्रांत

कल्याण। कल्याण पूर्व के प्रभाग क्रमांक 12 से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी–वंचित बहुजन आघाड़ी के उम्मीदवार विक्रांत जगन्नाथ (अप्पा) शिंदे की चुनावी संभावनाओं को लेकर क्षेत्र में लगातार संदेह व्यक्त किया जा रहा है। चुनावी माहौल में जहां एक ओर राजनीतिक दल अपने-अपने दावों के साथ मैदान में हैं, वहीं दूसरी ओर प्रभाग की जनता के मन में उम्मीदवार को लेकर कई अनुत्तरित सवाल खड़े होते नजर आ रहे हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विक्रांत शिंदे अपने चुनाव प्रचार में स्वयं के कार्यों से अधिक अपने पिता अप्पा शिंदे द्वारा पूर्व में किए गए विकास कार्यों का हवाला देते दिखाई दे रहे हैं। जनसभाओं और प्रचार अभियानों में अप्पा शिंदे स्वयं भी सक्रिय भूमिका निभाते हुए अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को गिनाते रहे हैं। सड़क, पानी, समाजसेवा और अन्य स्थानीय मुद्दों पर अपने योगदान का उल्लेख करते हुए वे जनता से समर्थन की अपील करते नजर आए, लेकिन इसी बीच यह सवाल भी जोर पकड़ता जा रहा है कि आखिर उम्मीदवार विक्रांत शिंदे की व्यक्तिगत उपलब्धियां क्या हैं।

प्रभाग क्रमांक 12 की जनता के बीच यह चर्चा आम है कि चुनाव जीतने के बाद क्या विक्रांत शिंदे स्वतंत्र रूप से जनता की समस्याओं को समझकर उनके समाधान के लिए ठोस कदम उठा पाएंगे या नहीं। कई मतदाताओं का मानना है कि केवल विरासत और पारिवारिक नाम के सहारे चुनाव जीतना आज के जागरूक मतदाता को स्वीकार्य नहीं है। जनता अब उम्मीदवार से यह जानना चाहती है कि उसने अब तक क्षेत्र के लिए क्या किया है और भविष्य में उसकी विकास की स्पष्ट योजना क्या होगी।

चुनावी चर्चाओं के दौरान यह भी देखा गया कि जब जनता ने सीधे तौर पर विक्रांत शिंदे के कार्यों को लेकर सवाल उठाए, तो उनके समर्थक या प्रचारक इस पर स्पष्ट उत्तर देने से बचते नजर आए। इससे मतदाताओं के बीच असमंजस और गहराता चला गया। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि चुनाव केवल भावनाओं या पुराने कार्यों की याद दिलाकर नहीं जीता जा सकता, बल्कि वर्तमान और भविष्य की ठोस कार्ययोजना प्रस्तुत करना आवश्यक है।

प्रभाग क्रमांक 12 के मतदाताओं के मन में उठ रहे ये सवाल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी–वंचित बहुजन आघाड़ी के लिए चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। जनता का एक बड़ा वर्ग यह तय करने की कोशिश में है कि क्या वह ऐसे उम्मीदवार को समर्थन दे, जिसकी पहचान अब तक अपने पिता के कार्यों तक सीमित मानी जा रही है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विक्रांत शिंदे इन सवालों का कैसे जवाब देते हैं और क्या वे मतदाताओं का भरोसा जीत पाने में सफल हो पाते हैं या नही ?

रिपोर्टर

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