संस्कृत भारतीय भाषाओं की साझा कड़ी, औपनिवेशिक दृष्टि ने किया महत्व धूमिल: प्रो. लक्ष्मी निवास पाण्डेय
- रामजी गुप्ता, सहायक संपादक बिहार
- Jan 19, 2026
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गयाजी ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट
गया जी : दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के इंग्लिश एंड फॉरेन लैंग्वेजेज विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पाण्डेय ने कहा कि संस्कृत अन्य वैश्विक भाषाओं की जननी रही है और इसने भारतीय भाषाओं को व्याकरणिक मजबूती प्रदान की है। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक मानसिकता से ग्रस्त भाषाविदों ने संस्कृत को ‘सम अननोन लैंग्वेज’ कहकर इसके महत्व को धूमिल किया।
विशिष्ट अतिथि प्रो. मोहन ने भाषाओं को सभ्यता, दर्शन और अस्मिता की रीढ़ बताया। अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने एनईपी-2020 में मातृभाषा आधारित शिक्षा पर जोर देते हुए भाषा के आधार पर राज्यों के गठन को ऐतिहासिक भूल बताया।
कार्यक्रम का संचालन शोधार्थी नीलम केडिया ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. नीतीश कुमार ने दिया। तकनीकी सत्र में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों ने व्याख्यान प्रस्तुत किए।


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